सुकमा के बीहड़ों में पहली बार बजी मोबाइल की घंटी, गोंडिगुड़ा में लगा नया मोबाइल टॉवर

सुकमा/ दशकों तक भौगोलिक दुर्गमता और संचार सुविधाओं के अभाव से जूझते सुकमा के सुदूर वनांचलों में अब विकास की नई तस्वीर उभर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के सुशासन और संवेदनशील नेतृत्व में बस्तर के अंतिम छोर तक डिजिटल कनेक्टिविटी पहुंचाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का सीधा लाभ ग्रामीणों को मिल रहा है। कभी मोबाइल नेटवर्क की एक अदद तरंग के लिए तरसने वाले गांव अब देश-दुनिया से जुड़ रहे हैं।

जिला प्रशासन की निरंतर निगरानी और तत्परता से गोंडिगुड़ा सहित सुन्नापेंटा, दूंगाबाबू और टेटरई जैसे अंदरूनी गांवों में मोबाइल नेटवर्क बहाल हुआ है। इससे करीब 4 हजार से अधिक ग्रामीणों की जिंदगी आसान हुई है। वर्षों से जरूरी फोन कॉल करने या अपनों की कुशलक्षेम जानने के लिए मीलों पैदल चलने वाले ग्रामीण अब गांव में ही मोबाइल से संपर्क कर पा रहे हैं। फोन की घंटी की आवाज उनके लिए सुविधा के साथ-साथ सुरक्षा और भरोसे का नया संदेश लेकर आई है।

डिजिटल कनेक्टिविटी ने ग्रामीण युवाओं के सपनों को भी नई उड़ान दी है। अब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थी गांव में रहकर ऑनलाइन कक्षाओं, डिजिटल अध्ययन सामग्री और इंटरनेट आधारित शिक्षा का लाभ उठा रहे हैं। वहीं स्थानीय लोककला, वनोपज और हस्तशिल्प से जुड़े ग्रामीणों के लिए डिजिटल माध्यमों से बड़े बाजारों तक पहुंच बनाने और रोजगार के नए अवसर तलाशने की राह भी आसान हुई है।

नेटवर्क की सुविधा से सरकारी योजनाओं की जानकारी और जनकल्याणकारी सेवाओं की पहुंच भी तेज हुई है। डिजिटल बैंकिंग, डीबीटी के माध्यम से मिलने वाली सहायता राशि तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी अब ग्रामीणों तक आसानी से पहुंच रही है। आपात स्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं, एंबुलेंस और प्रशासन से तत्काल संपर्क की सुविधा ने दूरस्थ परिवारों के लिए सुरक्षा का मजबूत सहारा प्रदान किया है।

ई डिस्ट्रिक्ट मैनेजर मो. शाहिद ने बताया कि बीएसएनएल की ‘4G सैचुरेशन परियोजना’ के तहत बस्तर संभाग के 195 दुर्गम स्थानों पर नए मोबाइल टॉवर सक्रिय किए गए हैं। तेज इंटरनेट और निर्बाध कॉलिंग की सुविधा से वनांचल के ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है। यह पहल इस बात का प्रमाण है कि मजबूत इच्छाशक्ति, प्रशासनिक सक्रियता और जनहित के संकल्प के साथ घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच भी विकास की रोशनी पहुंचाई जा सकती है। सुकमा के इन गांवों में बजती मोबाइल की घंटियां अब सिर्फ संपर्क का माध्यम नहीं, बल्कि नए अवसर, नई उम्मीद और विकसित भविष्य की आवाज बन गई हैं।

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