बेबसी की झोपड़ी छोड़ पक्के मकान में रहने गईं हड़मे कवासी

अभावों के अंधेरे से सम्मान की जिंदगी तक, ‘बिहान’ योजना से हड़मे बनी आत्मनिर्भर

पुराना घर

सुकमा. चुनौतियों और अभावों के घने अंधेरे को चीरकर छिंदगढ़ विकासखण्ड के ग्राम जैमेर में बदलाव की एक नई शुरुवात हुई है। आत्मसमर्पित नक्सली स्वर्गीय कवासी सोमडू देवा के निधन के बाद उनकी पत्नी श्रीमती कवासी हड़मे का जीवन संकटों से घिर गया था। जर्जर, कच्ची झोपड़ी में रहते हुए बरसात और तपती गर्मी जैसी प्राकृतिक आपदाओं को झेलना उनका रोज का संघर्ष था। सीमित संसाधनों के कारण न सिर्फ जीवनयापन कठिन था, बल्कि आत्मसम्मान से जीने की राह भी धुंधली थी। लेकिन शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं ने इस पीड़ित परिवार के दुखों का अंत कर उनके जीवन में उम्मीद की नई किरण बिखेर दी है।

कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देशन और जिला सीईओ श्री मुकुंद ठाकुर के मार्गदर्शन में प्रधानमंत्री आवास योजना(ग्रामीण) के तहत स्वीकृत हुए पीएम आवास ने इस परिवार की तकदीर बदल दी है। आज हड़मे कवासी का पक्का, सुरक्षित और आधुनिक सुविधाओं से लैस घर पूरी तरह बनकर तैयार है, जिसने उन्हें प्राकृतिक आपदाओं के डर से मुक्ति और समाज में एक सम्मानजनक स्थान दिया है। इसी गरिमा को आगे बढ़ाते हुए स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत घर में शौचालय का निर्माण भी कराया गया है। इसने न केवल परिवार को स्वच्छता और सुरक्षा का कवच दिया है, बल्कि उनके स्वास्थ्य और जीवन स्तर में भी एक बड़ा और सकारात्मक सुधार लाया है।

बदलाव का यह सफर सिर्फ एक सुरक्षित छत तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने हड़मे कवासी को आर्थिक आजादी भी दी है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत ‘रैला पुंगार स्व-सहायता समूह’ से जुड़कर वे आज विभिन्न आजीविका गतिविधियों का सफलतापूर्वक संचालन कर रही हैं। नियमित आय के साधनों ने उनकी आर्थिक रीढ़ को मजबूत किया है, जिससे वे आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही हैं। शासन की योजनाओं से मिले इस संबल के लिए हड़मे देवा और उनके परिवार ने भारत सरकार व छत्तीसगढ़ शासन के प्रति दिल से आभार व्यक्त किया है, जो आज कई जरूरतमंदों के लिए प्रेरणा का मिसाल बन चुकी हैं।

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