65 बार रक्तदान कर मानव सेवा की मिसाल बने अजयपाल सिंह जसवाल

जगदलपुर.  बस्तर मानव सेवा, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता सफाई झिल्ली-पन्नी प्लास्टिक की खाली बोतलों के विस्थापन और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहने वाले जगदलपुर बस्तर निवासी अजयपाल सिंह जसवाल को रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में सम्मानित किया गया।

08 मई 2026 को छ.ग. की राजधानी रायपुर स्थित विशाल एवं सुसज्जित अटल बिहारी वाजपेई ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में महामहिम राज्यपाल पुरस्कार के तहत राज्य शिक्षा मंत्री साहू जी द्वारा उन्हें उत्कृष्ट सामाजिक कार्यों व 65 वीं बार रक्तदान करने और जरूरतमंदों को रक्त उपलब्ध कराने में विशेष योगदान के लिए सर्टिफिकेट व मोमेंटो देकर सम्मान प्रदान किया गया…।

इस गरिमामई समारोह में शिक्षा मंत्री श्री साहू जी राज्य रेड क्रॉस सोसाइटी के चेयरमैन डोमन साहू जी, वाइस चेयरमैन, उपाध्यक्ष व अन्य दायित्व वान व्यक्तियों सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे, खचाखच भरे ऑडिटोरियम में समारोह के दौरान अजयपाल सिंह जसवाल के सामाजिक योगदान की विशेष सराहना की गई।

अजयपाल सिंह जसवाल अब तक 65 बार रक्तदान कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने में भी सदा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वे लंबे समय से लोगों को रक्तदान के प्रति जागरूक करने और मानव सेवा के कार्यों से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।

रक्तदान के साथ-साथ अजयपाल सिंह जसवाल पिछले सात वर्षों से स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी पूर्ण रूप से सक्रिय हैं। वे स्वच्छता एंबेसडर के रूप में कार्य करते हुए शहर और आसपास के क्षेत्रों में सफाई अभियान, जन जागरण अभियान के तहत कार्यक्रमों को आयोजित कर लोगों में जागरूकता फैलाने का काम करते रहते हैं, और समय-समय पर पौधारोपण अभियान चलाते रहे है, व पौधों के रोपण- संरक्षण- संवर्धन जैसे कार्यक्रम में भाग लेते रहते हैं व अन्य माध्यमों से भी जन चेतना की अलख जागते रहे हैं। पौधारोपण को उन्होंने अपने सामाजिक अभियान का मुख्य हिस्सा बनाया है।

इंद्रावती बचाओ जैसे महा अभियानों में उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था व इसी क्रम में अलग-अलग सुरक्षित स्थानों में और स्कूलों के कैंपस में 5000 पौधों का रोपण कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया था… तत्पश्चात निरंतर 75 दिनों तक चलने वाले छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े लगभग 300 सौ साल पुराने ऐतिहासिक तालाब जो उसे समय लगभग 427 एकड़ में फैला यह तालाब जो आज सिमटकर लगभग 310 एकड़ रह गया है। यह ऐतिहासिक तालाब बस्तर के महाराजा दलपत देव के नाम से बना दलपत सागर बचाओ अभियान के मुख्य सूत्रधार के रूप में बहुत अथक श्रम किया वह इस तालाब की सफाई संरक्षण संवर्धन के लिए काम किया व गत वर्ष उन्होंने निरंतर 10 माह तक शहर के दूसरे सबसे बड़े तालाब जिससे शहर का भूजल स्तर बना रहता है के खत्म होते अस्तित्व को बचाने व तालाब की स्वच्छता और रख रखाव के लिए निरंतर अथक प्रयास किया, और प्रयास कर जन जागरण अभियान व शासन प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने की पुरजोर कोशिश की…।

सम्मान मिलने के बाद अजयपाल सिंह जसवाल ने कहा कि समाज सेवा ही उनके जीवन का उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि स्वच्छता एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है जो निरंतर जारी रहनी चाहिए। उन्होंने युवाओं से रक्तदान, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण जैसे अभियानों से जुड़ने की अपील की…। हम उनके उज्जवल भविष्य व सफल जीवन की कामना करते हैं…

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