बकावंड में धान, गेहूं और बांस की पर्यावरण-अनुकूल राखियों से संवर रही आजीविका

जगदलपुर, 24 अगस्त . रक्षाबंधन के पावन पर्व पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की विशेष पहल और प्रेरणा से जिले के बकावंड क्षेत्र की ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण की एक नई मिसाल पेश कर रही हैं। इस योजना के तहत आड़ावाल में छह दिवसीय विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद झरना और मोंगरा फूल स्व-सहायता समूह की दस महिलाओं ने एकजुट होकर पूरी तरह से प्राकृतिक व पारंपरिक सामग्रियों जैसे-धान, गेहूं, चावल और बांस से आकर्षक राखियां बनाने की शुरुआत की है। इस कार्य में फरसीगांव और भेजरीपदर जैसे गांवों की महिलाएं बढ़-चढ़कर भाग ले रही हैं।

शुरुआत में लगभग 5 हजार रूपए की लागत से सामग्री जुटाकर शुरू किए गए इस काम ने अब तेजी पकड़ ली है। समूह के सदस्य प्रतिदिन औसतन 70 से 90 राखियां तैयार कर रहे हैं। महिलाओं ने कार्यप्रणाली को व्यवस्थित रखने के लिए जिम्मेदारियां भी बांट ली हैं, कुछ सदस्य जहां राखी निर्माण का कार्य संभालती हैं। वहीं अन्य सदस्य जनपद पंचायत बकावंड, स्थानीय हाट-बाजारों में स्टॉल लगाकर इनकी बिक्री का जिम्मा निभा रही हैं।
बाजार में इन हस्तनिर्मित पर्यावरण-अनुकूल राखियों को 30 से 40 रुपये प्रति नग की दर से बेचा जा रहा है, जिन्हें खरीदारों का शानदार प्रतिसाद मिल रहा है। समूह की सदस्य पार्वती के अनुसार अब तक वे 10 हजार रूपए से अधिक की राखियां बेच चुकी हैं, जिससे उनकी मूल लागत निकल चुकी है और वे अच्छे मुनाफे की ओर बढ़ रही हैं। मुख्यमंत्री की इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को न केवल मजबूत आर्थिक संबल मिल रहा है, बल्कि स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक शिल्प को भी नई पहचान मिल रही है।

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