आत्मसमर्पण के बाद बदली जिंदगी, कमलू राम नुरेटी का पक्का आशियाना हुआ साकार

नारायणपुर, 02 जुलाई । ओरछा विकासखंड के ग्राम पंचायत कोहकामेटा निवासी कमलू राम नुरेटी के जीवन में अब एक नई शुरुआत हुई है। कभी नक्सल संगठन से जुड़े रहे कमलू राम ने वर्ष 2013 में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। इसके बाद उन्होंने समाजहित में कार्य करते हुए न केवल अपने जीवन को नई दिशा दी, बल्कि अन्य नक्सल प्रभावित लोगों को भी हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करने के लिए प्रेरित किया। उनके इस सकारात्मक प्रयास ने उन्हें समाज में एक नई पहचान दिलाई है।
राज्य शासन द्वारा संचालित पुनर्वास योजनाओं का लाभ मिलने से कमलू राम का वर्षों पुराना पक्के घर का सपना भी साकार हो गया। वर्ष 2024-25 में विशेष परियोजना के अंतर्गत आत्मसमर्पित नक्सल पीड़ित योजना के तहत उनका सर्वेक्षण किया गया, जिसके बाद उन्हें ₹1.20 लाख की लागत से आवास स्वीकृत किया गया। आवास निर्माण कार्य के दौरान मनरेगा के माध्यम से उन्हें ₹23,490 की मजदूरी भी प्रदान की गई, जिससे निर्माण कार्य में आर्थिक सहयोग मिला। अब उनका पक्का मकान पूरी तरह तैयार हो चुका है और वे अपने परिवार के साथ सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण में जीवनयापन कर रहे हैं।
कमलू राम बताते हैं कि पहले वे किराये के मकान में रहते थे, जिससे उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। आज अपना स्थायी घर मिलने से उनके परिवार में खुशी का माहौल है। आवास के साथ उन्हें स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय तथा सौभाग्य योजना के माध्यम से बिजली की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इन मूलभूत सुविधाओं ने उनके जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार किया है।
जिला प्रशासन का मानना है कि आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए संचालित योजनाएं सकारात्मक परिणाम दे रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का अवसर मिल रहा है। कमलू राम नुरेटी की कहानी इस बात का उदाहरण है कि शासन की पुनर्वास योजनाएं और समाज का सहयोग मिलकर किसी भी व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। ऐसे प्रयास क्षेत्र में शांति, विकास और विश्वास को मजबूत बनाने के साथ-साथ मुख्यधारा से जुड़ने के लिए अन्य लोगों को भी प्रेरित कर रहे हैं।

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