सुकमा, 24 मई . कभी नक्सलियो के दहसत के कारण छत्तीसगढ़ के धुर नक्सल प्रभावित दक्षिण बस्तर सुकमा जिले के एक सुदूर गांव से बेहद अनोखी लेकिन सिस्टम को आईना दिखाती एक गंभीर मांग सामने आई है। सालों से अधूरी सड़क और बदहाल रास्तों से जूझ रहे मारुकी (मारोकी) गांव के ग्रामीणों ने अब सीधे देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर अपने लिए ‘हेलीकॉप्टर’ की मांग की है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा यह आवेदन अब सिर्फ एक मांग नहीं, बल्कि इलाके की बुनियादी बदहाली और प्रशासनिक सुस्ती पर एक बड़ा सियासी और सामाजिक सवाल बन गया है।
गांव के सरपंच ने अपनी बेबसी और नाराजगी जाहिर करते हुए बताया कि पिछले 10 वर्षों से गांव में सड़क निर्माण की मांग की जा रही है। सरपंच का कहना है:
हमने जिला स्तर के छोटे अधिकारियों से लेकर कलेक्टर तक, हर चौखट पर आवेदन दिया। हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है, लेकिन जमीन पर कोई काम नहीं होता। हमारी सुनवाई करने वाला कोई नहीं है.
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव को जोड़ने वाली सड़क का निर्माण पिछले 10 वर्षों से अधूरा पड़ा है। ठेकेदार और विभाग ने सड़क बनाने के नाम पर कई जगहों पर पुल-पुलिया के लिए बड़े-बड़े गड्ढे तो खोद दिए, लेकिन उन्हें कभी पूरा नहीं किया। वर्तमान में पूरी सड़क पर सिर्फ गिट्टियां बिखरी पड़ी हैं, जिससे पैदल चलना भी दूभर हो गया है। गांव तक पहुंचने का रास्ता पूरी तरह ठप होने की वजह से ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है।
मारुकी गांव के आगे पहाड़ी इलाका शुरू होने के कारण स्थितियां और भी ज्यादा संवेदनशील हो जाती हैं। ग्रामीणों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा गांव में जब भी कोई गर्भवती महिला या बुजुर्ग बीमार होता है, तो हमारे पास उन्हें खाट (चारपाई) पर लादकर मुख्य सड़क तक ले जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता। अगर किस्मत अच्छी रही तो मुख्य सड़क पर एम्बुलेंस मिल जाती है, वरना उसी खाट के सहारे मरीजों को कई किलोमीटर दूर गादीरास अस्पताल तक पैदल ले जाना पड़ता है
अक्सर ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के लिए धरना-प्रदर्शन या चक्काजाम करते हैं, लेकिन सुकमा के आदिवासियों का यह तरीका बिल्कुल अलग है। ग्रामीणों का कहना है कि जब सरकार 10 साल में एक अदद सड़क नहीं बना सकती, तो फिर उन्हें आवागमन के लिए हेलीकॉप्टर ही दे दिया जाए ताकि आपातकाल में कम से कम मरीजों की जान तो बचाई जा सके।
यह अनोखा आवेदन अब प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है, और देखना होगा कि इस ‘हेलीकॉप्टर’ वाली गुहार के बाद सोए हुए सिस्टम की नींद टूटती है या नहीं। वही आपको बता दे कि छत्तीसगढ़ में विकास के दावों के बीच एक प्रशासन को आईना दिखाने वाला मामला सामने आया है। सालों से सड़क की राह तक रहे ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब दे गया है। जिला अधिकारियों और कलेक्टर के दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर थक चुके ग्रामीणों ने अब सीधे देश के गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर अपने गांव के लिए एक हेलीकॉप्टर की मांग कर दी है।
गांव के ग्रमीण सुका कहा कहना है कि गांव का सड़क 10 वर्ष से बन रहा है पर आज तक अधूरा है बरसात के समय हमें मरीज बीमार पड़ जाए तो घाट ही सहारा है राशन के लिये 11 किलोमीटर पैदल कोरा आना पड़ता है टेक्टर मिलता है तो एक 100 रुपये किराया लेते है सरकार हमे मुफ्त में राशन देती है उसके लिये हमें पैसे खर्च करने पड़ते है.
जब हम गांव के ग्रामीण से मिले उनका कहना था कि हमारे गांव में सड़क 10 वर्ष से बन रहा है जो आज तक नही बना है जिसके पास पैसे होते है 100 रुपये किराया दे कर राशन लेने जाता है पैसे नही है तो पैदल ही जाना पड़ता है शासन के मुफ्त के राशन के लिये हमें पैसे खर्च करने पड़ते है देश के गृहमंत्री अमित शाह से हमारी मांग है गांव की सड़क बना दे या गांव के लिये हेलिकॉप्टर ही दे दे.