पोटाकेबिन केरलापाल के बच्चों ने साइंस पार्क में समझी विज्ञान की दुनिया

सुकमा/ वनांचल क्षेत्र के विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा और वैज्ञानिक नवाचारों से जोड़ने की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में बालक आवासीय विद्यालय (पोटाकेबिन) केरलापाल के 40 छात्रों को साइंस पार्क सुकमा का विशेष शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। प्रशासन की इस दूरदर्शी पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण व दूरस्थ अंचल के बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना, उनकी स्वाभाविक जिज्ञासा को प्रोत्साहित करना और किताबी सिद्धांतों को प्रयोगात्मक व रोचक माध्यमों से सीधे अनुभव कराना था।

साइंस पार्क भ्रमण के दौरान छात्रों ने ‘करके सीखो’ (लर्निंग बाय डूइंग) के व्यावहारिक दृष्टिकोण को आत्मसात किया। विद्यार्थियों ने ऊर्जा संरक्षण का नियम, न्यूटन का तृतीय गति नियम, लोलक, सूर्य घड़ी, प्रतिध्वनि नली, अपकेंद्री बल, फ्लोटिंग बर्ड तथा समतल एवं गोलाकार दर्पण जैसे प्रमुख वैज्ञानिक मॉडलों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। इसके साथ ही पवन चक्की के कार्य सिद्धांत, कंडक्टिविटी टेस्टर और न्यूटन डिस्क जैसे छोटे मॉडलों को खुद संचालित कर बच्चों ने विज्ञान के जटिल नियमों को सहजता से समझा, जिससे उनका आत्मविश्वास और सीखने का उत्साह कई गुना बढ़ गया।

प्रशासन द्वारा स्थापित अत्याधुनिक एआर/वीआर (ऑगमेंटेड एवं वर्चुअल रियलिटी) लैब इस शैक्षणिक दौरे का मुख्य आकर्षण रही। अत्याधुनिक वीआर हेडसेट पहनकर सुदूर क्षेत्र के इन नन्हे विद्यार्थियों ने आभासी दुनिया में कदम रखा और ऊष्मा, रेशे तथा वस्त्र, पदार्थ की अवस्थाएं (ठोस, द्रव और गैस), गैस व पेट्रोलियम के निर्माण चक्र सहित विश्व धरोहर एफिल टॉवर जैसी वैश्विक संरचनाओं को 3D विज़ुअल के माध्यम से जीवंत रूप में देखा। प्रत्येक सत्र के उपरांत विशेषज्ञों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के सटीक उत्तर देकर छात्रों ने अपनी गहरी समझ और तीक्ष्ण मेधा का शानदार परिचय दिया।

शैक्षणिक गतिविधियों के सफल समापन के बाद बच्चों के समग्र मानसिक विकास और मनोरंजन के लिए जिला प्रशासन द्वारा तुंगल बांध का भ्रमण कराया गया। सुरम्य प्राकृतिक वातावरण में विद्यार्थियों ने नौकायन (बोटिंग) का भरपूर आनंद लिया, जहां उनके लिए सुरुचिपूर्ण भोजन की भी समुचित व्यवस्था की गई थी। विज्ञान, तकनीक और प्रकृति के इस अनूठे संगम ने बच्चों के चेहरे पर अपार खुशी बिखेर दी। सुदूर क्षेत्रों में अध्ययनरत प्रतिभाओं को आधुनिकतम तकनीक और ज्ञान से समृद्ध कर मुख्यधारा से जोड़ने का जिला प्रशासन का यह संवेदनशील प्रयास अत्यंत सराहनीय और अनुकरणीय सिद्ध हो रहा है।

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