जगदलपुर . वन मंत्री केदार कश्यप ने हल्बी भाषा में संबोधन देते हुए अपने अंदाज में सियासी हमला बोला। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बाघ और कांग्रेस सहित विपक्षी दलों को ‘कोलिया’ बताते हुए जनता से सवाल किया कि आप बाघ की तरफ रहना पसंद करेंगे या कोलिया की तरफ? उनके इस स्थानीय भाषा में दिए गए राजनीतिक संदेश ने सभा में मौजूद कार्यकर्ताओं का ध्यान खींचा।कश्यप ने कहा कि देश का प्रधानमंत्री कौन होगा, यह पाकिस्तान या बांग्लादेश नहीं, बल्कि भारत की जनता तय करेगी। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में बाघ ही दहाड़ेगा।केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी उन्हें बार-बार लॉन्च करने का प्रयास करती है, लेकिन वे लॉन्च नहीं हो पाते। उन्होंने दीपावली के रॉकेट का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि एक-दो बार कोशिश करने के बाद भी रॉकेट लॉन्च नहीं होता तो लोग उसे हटाकर दूसरी तरफ रख देते हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी राहुल गांधी के बार-बार असफल होने के बावजूद उन्हें जबरन लॉन्च करने में लगी रहती है।मांडविया ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चुनाव का उल्लेख करते हुए भी कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि इंदिरा गांधी ने इलाहाबाद में चुनावी अनियमितताओं के जरिए जीत हासिल की थी और बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनका चुनाव रद्द कर दिया था। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने कांग्रेस के लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर पलटवार किया।किरण देव बोले- जनता नकार रही तो अराजकता के रास्ते सत्ता चाहती है कांग्रेसभाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि चुनावों में लगातार जनता द्वारा नकारे जाने के बाद कांग्रेस देश में अराजकता फैलाकर सत्ता हासिल करना चाहती है। उन्होंने कहा कि जनता का समर्थन नहीं मिलने के बावजूद कांग्रेस राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रही है।अपने संबोधन में किरण देव ने सीजेपी पर भी निशाना साधा। उन्होंने उसे विदेशी फंडिंग पर पलने वाला ‘तिलचट्टों का गिरोह’ बताया। उनके इस बयान ने सभा के राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया।सभा से सड़क तक भाजपा का शक्ति प्रदर्शनदंतेश्वरी मंदिर के सामने आयोजित जनसभा के बाद भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शहर में विशाल पदयात्रा निकाली। इसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। केंद्रीय मंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और वन मंत्री के एक के बाद एक तीखे बयानों ने कार्यक्रम को केवल जनसभा तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि इसे कांग्रेस और विपक्ष के खिलाफ भाजपा के बड़े राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा गया।