जगदलपुर . लगभग एक शताब्दी का गौरवशाली जीवन जीने वाले श्रद्धेय सीताराम कपूर जी ने अपना संपूर्ण जीवन धर्म, समाजसेवा और लोककल्याण के लिए समर्पित कर दिया। वे जगदलपुर के ऐसे कर्मयोगी थे, जिनकी पहचान केवल एक धार्मिक व्यक्तित्व के रूप में नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग के सुख-दुख में सहभागी रहने वाले सेवाभावी नागरिक के रूप में भी थी।
मां दंतेश्वरी और महावीर बजरंग बली के परम भक्त सीताराम कपूर जी ने जीवनभर मंदिरों में सेवा, पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज को आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का सतत प्रयास किया। उनका मानना था कि धर्म केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और सेवा की प्रेरणा देने का माध्यम है।
जनकल्याण के कार्यों में भी उनका योगदान अविस्मरणीय रहा। लगभग तीन दशक पूर्व उन्होंने मुक्ति धाम में ट्यूबवेल स्थापित कराने तथा जनसहयोग से वहां आगंतुकों के लिए शेड निर्माण कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह कार्य आज भी उनकी दूरदर्शिता, संवेदनशीलता और समाजहित के प्रति समर्पण का जीवंत प्रमाण है।
संजू बत्रा ने अपने कन्डोलस में कहा कि श्रद्धांजलि सभाओं में “सियाराम, जय राम, जय जय राम” के मंत्रोच्चार के माध्यम से दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करना उनकी विशिष्ट पहचान बन गया था। उनके मधुर स्वर में गूंजने वाला यह मंत्र अनेक परिवारों को आध्यात्मिक संबल और सांत्वना प्रदान करता था।
सीताराम कपूर जी का संपूर्ण जीवन सादगी, सेवा, विनम्रता, धर्मनिष्ठा और मानवीय मूल्यों का अनुपम उदाहरण रहा। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। समाज उनकी सेवाओं, समर्पण और आध्यात्मिक विरासत को सदैव कृतज्ञता और श्रद्धा के साथ स्मरण करता रहेगा।