पत्रकार रौनक शिवहरे की गिरफ्तारी पर बस्तर संभाग में उबाल, सात जिलों में पत्रकारों का मौन आंदोलन

जगदलपुर। दंतेवाड़ा जिले के गीदम निवासी पत्रकार रौनक शिवहरे और उनके परिवार के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले तथा गिरफ्तारी को लेकर बस्तर संभाग के पत्रकारों में भारी आक्रोश देखने को मिला। मामले के विरोध में सोमवार को संभाग के सभी जिलों—बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर, कोंडागांव और कांकेर में पत्रकारों ने मौन धरना देकर विरोध प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम संबंधित जिला कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपा।

संभाग मुख्यालय जगदलपुर में स्थानीय पत्रकारों ने कमिश्नर कार्यालय के समक्ष एक घंटे तक मौन धरना दिया। इसके बाद सभी पत्रकार रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम कलेक्टर आकाश छिकारा को ज्ञापन सौंपकर मामले की न्यायिक जांच की मांग की।

ज्ञापन में बताया गया कि 6 मार्च 2026 को दंतेवाड़ा जिले के गीदम में पत्रकार रौनक शिवहरे के घर के सामने एक ट्रैक्टर चालक, जो कथित रूप से नशे में था, ने उनकी स्कूटी को टक्कर मार दी। आरोप है कि चालक ने ट्रैक्टर से उनके पिता और दो साल की बच्ची को कुचलने की भी कोशिश की, हालांकि दोनों बाल-बाल बच गए।

घटना की जानकारी मिलने पर रौनक शिवहरे मौके पर पहुंचे और ट्रैक्टर चालक से विवाद के बाद गीदम थाने में लिखित शिकायत दी। पत्रकारों का आरोप है कि पुलिस ने उनकी शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं की। उल्टा ट्रैक्टर चालक और उसके सहयोगियों के दबाव में आकर रौनक शिवहरे तथा उनके माता-पिता के खिलाफ एसटी-एससी एक्ट सहित अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया और बिना उचित जांच के उन्हें जेल भेज दिया गया।

पत्रकारों का कहना है कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर रौनक शिवहरे और उनके माता-पिता पर लगाए गए आरोप न्यायसंगत नहीं हैं। एक पक्ष के दबाव में की गई इस कार्रवाई से पूरे पत्रकार समुदाय में आक्रोश है।

पत्रकारों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए और वास्तविक तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाए। ज्ञापन सौंपने के बाद पत्रकारों ने पूरे घटनाक्रम की कड़ी निंदा करते हुए न्याय की मांग दोहराई।

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