

जगदलपुर 25 मई। दक्षिण बस्तर क्षेत्र के बैलाडिला पहाड़ियांे के पीछे बसे लावा गांव में पहली बार राशन उपलब कराया गया। लावा गांव के इस ग्रामीणों को राशन लेने के लिए 45 किलोमीटर दूर हिरोली जाना पड़ता था। 90 किलोमीटर का सफर तीन दिनों में पूरा करते थे और उन्हें 35 किलो चांवल मिलता था। गांव के लोगों को विश्वास भी नहीं हो रह है कि हमारे गांव में राशन दुकान पहुंच गया।
दंतेवाड़ा जिले के कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव 18 किलोमीटर पैदल चलकर दुर्गम जंगलों और पहाड़ियों की बीच बसे लावा गांव पहुंचे। ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्या सुनी और भरोसा दिलाया कि प्रशासन की मूलभूत सुविधा गांव तक पहुंचेगीं, जहां उम्मीद नई किरण बन कर आया। गांव के प्रमुख आयते कंुजाम ने बताया कि सरकार और सरकार के लोग पहली बार हमारे गांव पहंुचे और हमारे समस्याओं का निराकारण धीरे-धीरे करने का आश्वासन दिया है। पहले चरण में राशन दुकान प्रारंभ किया गया है। दंतेवाड़ा कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने कहा कि शासन की योजना का अधिकार अंतिम व्यक्ति तक पहंुंचे और सरकार अब पहाड़ियों के पीछे बने गांव में पहुंच चुकी है।
उन्होंने बताया कि दशकों तक नक्सल हिंसा के कारण ये गांव शासन और विकास से दूर रहे। अब जब माओवाद का असर कम हुआ है, तब प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।
जरूरत सिर्फ सड़क और राशन की नहीं, बल्कि भरोसा लौटाने की है। इन गांवों तक शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, रोजगार और संचार जैसी मूलभूत सुविधाएं जल्द पहुंचाना जरूरी होगा, ताकि विकास की यह नई शुरुआत स्थायी बन सके।
विदित हो कि लौह अयस्क की विशाल पहाड़ियों और घने जंगलों के पीछे बसे वे गांव, जहां दशकों तक सिर्फ नक्सलवाद का साया था, वहां अब पहली बार सरकार की मौजूदगी महसूस होने लगी है। बैलाडिला की लाल पहाड़ियों के पीछे रहने वाले आदिवासी परिवारों तक अब सरकारी योजनाएं पहुंच रही हैं। जिन हाथों ने वर्षों तक बाजार से चावल खरीदकर पेट भरा, उन्हें अब पहली बार मुफ्त राशन मिला है।