एक लाख के इनामी सहित दो नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

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जगदलपुर 24 अगस्त . सुकमा जिले के किस्टाराम में रहने वाले मिलिशिया कमांडर सहित दो नक्सलियों ने पुलिस की विचारधारा से प्रभावित होकर नक्सलियों का साथ छोड़कर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। बताया जा रहा है कि नक्सलियों को आत्समर्पण हेतु प्रोत्साहित कराने में 131 वाहिनी सीआरपीएफ के आसूचना शाखा का विशेष योगदान रहा है।

छत्तीसगढ़ शासन की नक्सलवाद उन्मूलन नीति के तहत विश्वास, विकास एवं सुरक्षा की भावना एवं सुकमा पुलिस द्वारा चलाये जा रहे पुना नर्कोम अभियान नई सुबह, नई शुरूआत से प्रभावित होकर नक्सलियों के अमानवीय, आधारहीन विचारधारा एवं उनके शोषण, अत्याचार तथा बाहरी नक्सलियों द्वारा भेदभाव करने तथा स्थानीय आदिवासियों पर होने वाले हिंसा से तंग आकर नक्सली संगठन में सक्रिय जोगा (मिलिशिया कमाण्डर एलमागुण्डा आरपीसी एक लाख ईनामी दो भीमा (आरपीसी अध्यक्ष + जीपीसी अध्यक्ष एलमागुण्डा आरपीसी अंतर्गत) दोनो निवासी थाना किस्टाराम क्षेत्र जिला सुकमा के द्वारा गुरुवार को नक्सल ऑपरेशन कार्यालय सुकमा में प्रभात कुमार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नक्सल ऑप्स सुकमा एवं अनंत हंस, सहायक कमाण्डेन्ट 131 वाहिनी सीआरपीएफ के समक्ष बिना हथियार के आत्मसमर्पण किया गया।  आत्मसमर्पित नक्सलियों को शासन की पुर्नवास योजना के तहत सहायता राशी और अन्य सुविधाएं प्रदान कराई जाने की बात भी कही गई है।
नक्सली जोगा (एक लाख ईनामी छग शासन द्वारा) का नक्सली संगठन में कार्यावधि वर्ष 2014 से 2016 तक मिलिशिया सदस्य था, वर्ष 2017 से अब तक मिलिशिया कमाण्डर के पद पर था, एलमागुण्डा कैम्प खुलने के पहले मिनपा-एलमागुण्डा मार्ग खोदने और स्पाईक लगाने की घटना में शामिल रहा, तोण्डामरका कैम्प खुलने के पहले स्पाईक लगाने की घटना में शामिल रहा, तोण्डामरका कैम्प पर हमले के दौरान संत्री ड्यूटी पर रहा।

नक्सली संगठन में वर्ष  2004- 2005 तक संघम सदस्य। वर्ष 2005 से 2006 तक कृषि कमेटी अध्यक्ष। वर्ष 2007 से अब तक एलमागुण्डा आरपीसी अध्यक्ष जीपीसी अध्यक्ष रहा, इसके अलावा नक्सली घटनायें जिसमे सम्मिलित रहा उसमें एलमागुण्डा कैम्प खुलने के पहले मिनपा-एलमागुण्डा मार्ग खोदने और स्पाईक लगाने की घटना में शामिल रहा।

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