वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने पुस्तक किट वितरण कर किया शुभारंभ, बच्चों में विकसित होगी पढ़ने की रुचि
गोंडी, हल्बी, हिंदी एवं अंग्रेजी भाषाओं की रोचक कहानियों और बाल साहित्य से समृद्ध होंगी विद्यालयों की लाइब्रेरी
नारायणपुर, 17 अक्टूबर . जिले के बच्चों में पुस्तक-पठन की रुचि विकसित करने, भाषा कौशल को मजबूत बनाने और शिक्षा को अधिक रोचक एवं प्रभावी बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। प्रदेश के वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने जिले में हैंगिंग लाइब्रेरी पहल के अंतर्गत प्राथमिक एवं आश्रम शालाओं के लिए पुस्तक किट का वितरण कर इसका शुभारंभ किया। इस पहल के माध्यम से जिले की 144 प्राथमिक एवं आश्रम शालाओं में बच्चों को रोचक कहानियों और गुणवत्तापूर्ण बाल साहित्य से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
इस अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि हैंगिंग लाइब्रेरी पहल जिले में बुनियादी साक्षरता एवं भाषा कौशल को सुदृढ़ करने और बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि पुस्तकों के माध्यम से बच्चों की कल्पनाशक्ति, रचनात्मकता, समझने की क्षमता और अभिव्यक्ति कौशल का विकास होता है। कहानियों के जरिए बच्चे सहज और आनंददायक तरीके से नई बातें सीखते हैं। विद्यालयों में इस तरह की पहल से बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित होगी और शिक्षा के प्रति उनकी रुचि बढ़ेगी।
प्रत्येक विद्यालय को मिलेंगी 100 रोचक पुस्तकें
हैंगिंग लाइब्रेरी पहल के तहत प्रथम बुक्स (Pratham Books) के सहयोग से जिले की 144 प्राथमिक एवं आश्रम शालाओं के लिए पुस्तक किट उपलब्ध कराई गई हैं। प्रत्येक किट में 100 पुस्तकें शामिल हैं। इन पुस्तकों में गोंडी, हल्बी, हिंदी एवं अंग्रेजी भाषाओं की रोचक कहानियां तथा विविध विषयों पर आधारित बाल साहित्य उपलब्ध कराया गया है।
बहुभाषी पुस्तकों की उपलब्धता इस पहल की प्रमुख विशेषता है। इसके माध्यम से बच्चों को अपनी मातृभाषा में कहानियां पढ़ने और समझने के साथ-साथ हिंदी एवं अंग्रेजी जैसी अन्य भाषाओं से परिचित होने का अवसर मिलेगा। स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध साहित्य बच्चों को कहानियों से जोड़ने, उनकी समझ विकसित करने और सीखने की प्रक्रिया को सहज बनाने में सहायक होगा। वहीं, विभिन्न भाषाओं की पुस्तकों के माध्यम से बच्चों की शब्दावली और भाषा संबंधी दक्षताओं में भी सुधार की संभावना है।
जिला प्रशासन और प्रथम बुक्स के बीच हुआ समझौता
इस पहल के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कलेक्टर श्रीमती नम्रता जैन की अध्यक्षता में जिला प्रशासन, नारायणपुर एवं प्रथम बुक्स के मध्य समझौता ज्ञापन (MoU) किया गया। इसका उद्देश्य विद्यालयों में पुस्तक-पठन की संस्कृति को प्रोत्साहित करना तथा बच्चों को पाठ्यपुस्तकों से इतर रोचक, रचनात्मक और गुणवत्तापूर्ण पठन सामग्री उपलब्ध कराना है।
जिला प्रशासन द्वारा पहल को केवल पुस्तक वितरण तक सीमित न रखते हुए शिक्षकों को इसके बेहतर उपयोग के लिए भी तैयार किया गया है। इसी क्रम में शैक्षिक सहयोग प्रदान करने वाली संस्था शिक्षार्थ (Shiksharth) तथा PPIA फेलो राहुल कुशवाहा के समन्वय से जिले की 144 प्राथमिक एवं आश्रम शालाओं के शिक्षकों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसे पूर्ण कर लिया गया है।
कहानी सुनाने और पढ़ने की गतिविधियों पर दिया गया प्रशिक्षण
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों को हैंगिंग लाइब्रेरी के प्रभावी संचालन और पुस्तकों के उपयोग के संबंध में जानकारी दी गई। शिक्षकों को बच्चों के साथ ‘रीड अलाउड’ (Read Aloud) गतिविधियां संचालित करने तथा कहानी-आधारित शिक्षण पद्धतियों को कक्षा में अपनाने के लिए प्रशिक्षित किया गया।
रीड अलाउड गतिविधि के अंतर्गत शिक्षक बच्चों को कहानियां पढ़कर सुनाएंगे, जिससे बच्चे कहानी के पात्रों, घटनाओं और संदेशों को समझ सकेंगे। इस दौरान बच्चों को प्रश्न पूछने, अपने विचार व्यक्त करने और कहानी के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। इससे कक्षा में उनकी सक्रिय भागीदारी बढ़ेगी और सीखने का वातावरण अधिक संवादात्मक एवं आनंददायक बनेगा।
कहानी-आधारित शिक्षण पद्धति बच्चों को पढ़ने के साथ-साथ सुनने, समझने, सोचने और अपनी बात कहने का अवसर प्रदान करती है। इससे भाषा संबंधी दक्षताओं के विकास के साथ बच्चों में आत्मविश्वास और रचनात्मक सोच को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सर्वांगीण विकास की दिशा में पहल
नारायणपुर जिले के दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए हैंगिंग लाइब्रेरी पहल महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। विद्यालयों में विभिन्न भाषाओं की पुस्तकें उपलब्ध होने से बच्चों को अपनी रुचि के अनुसार कहानियां पढ़ने और नए विषयों को जानने का अवसर मिलेगा। नियमित पुस्तक-पठन से बच्चों की शब्दावली, पढ़ने की गति, समझने की क्षमता और कल्पनाशक्ति को विकसित करने में मदद मिलेगी।
जिला प्रशासन का प्रयास है कि विद्यालयों में पुस्तक-पठन को नियमित शैक्षणिक गतिविधि के रूप में प्रोत्साहित किया जाए। इसके लिए पुस्तक किट की उपलब्धता के साथ शिक्षकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना गया है, ताकि बच्चे पुस्तकों से निरंतर जुड़ सकें और सीखने की प्रक्रिया को बोझ के बजाय आनंद के रूप में अनुभव करें।
हैंगिंग लाइब्रेरी पहल जिले में बुनियादी साक्षरता को मजबूत करने, बहुभाषी शिक्षा को प्रोत्साहित करने और बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। 144 प्राथमिक एवं आश्रम शालाओं में इस पहल के संचालन से बच्चों को पुस्तकों की दुनिया से जुड़ने का अवसर मिलेगा और विद्यालयों में पढ़ने की सकारात्मक संस्कृति विकसित करने में मदद मिलेगी।