संघर्ष से सफलता तक: गुपचुप और ऑमलेट की दुकान से खिलेश्वरी सहारे बनीं ‘लखपति दीदी’

बिहान योजना से मिला आत्मनिर्भरता का सहारा, मेहनत और लगन से परिवार की आर्थिक स्थिति को बनाया मजबूत

नारायणपुर, 11 अक्टूबर 2026// ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। योजना से जुड़कर जिले की अनेक महिलाएं आज स्वरोजगार के माध्यम से अपनी पहचान बना रही हैं। ऐसी ही प्रेरणादायी कहानी विकासखंड नारायणपुर अंतर्गत ग्राम बिंजली की निवासी खिलेश्वरी सहारे की है, जिन्होंने मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के बल पर आर्थिक कठिनाइयों को पीछे छोड़ते हुए ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पहचान स्थापित की है। कभी सीमित आय के कारण परिवार की जरूरतों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करने वाली खिलेश्वरी आज गुपचुप और ऑमलेट की दुकान संचालित कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

खिलेश्वरी सहारे के परिवार की आजीविका पहले सीमित कृषि और अस्थायी मजदूरी पर निर्भर थी। परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करने के साथ बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और घरेलू खर्चों का प्रबंधन करना चुनौतीपूर्ण था। आर्थिक परिस्थितियों के बीच खिलेश्वरी ने हार मानने के बजाय आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया। इसी दौरान वे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत जीवन स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह की बैठकों, नियमित बचत, वित्तीय प्रबंधन और स्वरोजगार संबंधी मार्गदर्शन से उन्हें अपनी आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने का अवसर मिला। समूह से जुड़ने के बाद उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने स्वयं का व्यवसाय शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाया।

बिहान योजना के माध्यम से ऋण प्राप्त कर खिलेश्वरी सहारे ने गुपचुप और ऑमलेट की दुकान शुरू की। उनके इस प्रयास में उनके पति कौशल सहारे भी सहयोग करते हैं। दोनों मिलकर दुकान का संचालन करते हैं और अपनी मेहनत से परिवार के लिए नियमित आय अर्जित कर रहे हैं। खिलेश्वरी के अनुसार, दुकान से उन्हें प्रतिमाह लगभग 30 हजार रुपये की आय प्राप्त होती है। इस आय से वे बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, घर की आवश्यक सामग्री और परिवार के अन्य खर्चों को पूरा करने में सहयोग कर पा रही हैं। स्वरोजगार ने उनके परिवार को आर्थिक मजबूती देने के साथ भविष्य के प्रति भरोसा भी बढ़ाया है।

आज खिलेश्वरी सहारे की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणादायी मिसाल भी है। अपनी मेहनत, लगन और स्वरोजगार के माध्यम से उन्होंने यह साबित किया है कि उचित मार्गदर्शन और शासकीय योजनाओं का लाभ लेकर महिलाएं अपनी आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। अब वे गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं।

खिलेश्वरी सहारे बताती हैं कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिला। समूह से प्राप्त सहयोग और स्वरोजगार के लिए मिले ऋण ने उनके सपनों को साकार करने में मदद की। आज वे अपने पति के साथ दुकान संचालित कर परिवार की जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभा रही हैं। उनके लिए सबसे बड़ी खुशी यह है कि वे अपने बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जरूरतों को पूरा करने में पहले से अधिक सक्षम हुई हैं। वे चाहती हैं कि गांव की अन्य महिलाएं भी स्व-सहायता समूहों से जुड़ें, स्वरोजगार अपनाएं और आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार की आर्थिक उन्नति में योगदान दें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *