जगदलपुर /जगदलपुर से 15 किलोमीटर दूर एक गांव के रहने वाले 4 वर्षीय सिद्धांत बघेल को जन्म से ही मोतियाबिंद की समस्या थी। चिरायु टीम के मेडिकल ऑफिसर डॉ. रमाशंकर चतुर्वेदी बच्चे को बेहतर इलाज के लिए रायपुर ले गए, जहां सफल उपचार के बाद मासूम की आंखों की रोशनी पूरी तरह वापस आ गई।
इस पूरे प्रसंग को सेवा संकल्प अभियान के आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम की भावना से जोड़कर देखा जा रहा है।
जिस तरह दीया अंधकार दूर करता है, ठीक उसी तरह सिद्धांत के जीवन में आई यह रोशनी योजना की सार्थकता और मानवीय संवेदना को दर्शाती है।छत्तीसगढ़ में संचालित श्चिरायु योजनाश् लगातार ऐसे बच्चों के लिए वरदान साबित हो रही है, जो गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। सिद्धांत की यह कहानी साबित करती है कि सही समय पर मिली चिकित्सीय मदद किसी के पूरे जीवन को बदल सकती है।