बस्तर की कला-संस्क़ृति, बोली-भाषा अंर्राष्ट्रीय पटल पर

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करीम
जगदलपुर, 19 जून  कल शाम स्थानीय होटल आकांक्षा के सभागार में नार्थ अमेरिका छत्तीसगढ़ एसोसिएशन (NACHA) के द्वारा साहित्यकारों की एक बैठक रखी गई थी, जिसमें बस्तर की बोली-भाषा को बढ़ावा देने के लिए तथा बस्तर के साहित्यकारों की रचनाओं को छत्तीसकोश एप के माध्यम से ऑनलाइन किये जाने हेतु सार्थक चर्चा हुई। नाचा के अध्यक्ष गणेश कर तथा संस्थापक सदस्या दीपाली सारावगी जी ने साहित्यकारों से चर्चा करते हुए जानकारी दी कि छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति, भाषा-साहित्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने हेतु 2017 में शिकागो से प्रारम्भ करते हुये आज 19 देशों में नाचा संस्था की इकाइयां स्थापित की जा चुकी है। आज 4000 से अधिक एनआरआई नाचा संस्था से जुड़ चुके हैं। नाचा संस्था छत्तीसगढ़ की धरोहर, कला- संस्कृति,पर्व-त्योहार ,बोली-भाषा, धरोहर आदि पर आधारित जानकारी अंतरराष्ट्रीय पटल पर स्थापित कर रही है। पिछले 10 जून को नाचा संस्था के द्वारा रायपुर में छत्तीसकोश एप को लांच किया, जिसमें अंग्रेजी शब्दों के अर्थ छतीसगढ़ी में तथा छत्तीसगढ़ी भाषा के शब्द अंग्रेजी में अनुवाद किया जा सकेगा। संस्था के अध्यक्ष गणेश कर ने इस एप का विस्तार करते हुए बस्तर की भाषा-बोलियों को भी छत्तीशकोश एप में शामिल करने का निर्णय लिया है। नाचा संस्था विदेशों मे छत्तीसगढ़ की संस्कृति और भारतीय संस्क़ृति, परंपराओं का परचम लहरा रही हैं। उन्होंने बस्तर के वरिष्ठ साहित्यकारों से मुलाकात कर बस्तर के लिए संभावनाओं पर विशेष चर्चा की। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार सुभाष पांडे, रुद्र नारायण पाणिग्राही, नरेंद्र पाढ़ी, पूर्णिमा सरोज, विक्रम सोनी, चमेली नेताम, महिला मीडिया से करमजीत कौर,अटलांटा में बसे नाचा से जुड़े अरुण कुमार और गणेश कर उपस्थित थे। बस्तर के उपस्थित सभी साहित्यकारों ने इस चर्चा के लिए उनका आभार जताया।

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