जगदलपुर । साहित्यकार शिवनारायण पांडे ने एक जारी बयान में कहा कि अबूझमाड़ का नक्सल मुक्त होना वाकई एक बहुत बड़ी घटना है, उस नक्सलवाद का खात्मा हो गया जिसकी कभी अबूझमाड़ में समानान्तर सरकार चला करती थी। वे अबूझमाड़ में जैसा कहते थे वैसा होता था। अबूझमाड़ियों को जैसा कहते उन्हें वैसा करना होता था। कई सालों तक वे अपने देवता के सम्मान में आयोजित विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक मावली मंडई नारायणपुर नहीं आये। क्योंकि नक्सली नहीं चाहते थे कि वे अबूझमाड़ से बाहर जायें। ऐसे कब्जे वाली जगह को एकाएक नक्सलियों ने छोड़ दिया और हथियार डाल दिया किसी को भी यकीन नहीं हो रहा है। वर्तमान में सब कुछ शान्त है। एक अजीब सी खामोशी है, किसी को भी समझ नहीं आ रहा है, कि यह तूफान के पहले की खामोशी है या तूफान के गुजर जाने के बाद की खामोशी है। जिला मुख्यालय अबूझमाड़ के लिये, यहाँ के लोगों के लिये यह समय ऐसा है कि “कारवाँ गुजर गया गुबार देखते रहे” वाली स्थिति है। खैर कुछ भी हो नक्सलियों की तरफ से किसी प्रकार की कोई घटना को अंजाम नहीं दिया जा रहा है। इसलिये सभी लोग केन्द्र और राज्य शासन के नक्सल मुक्त बस्तर और नक्सल मुक्त अबूझमाड़ की धोषणा को स्वीकार कर रहे हैं।
उन्होनंे कहा कि अबूझमाड़ फिर एक बार मावोवादी गीत गाने की बजाय अपना प्यारा लोक गीत रिलो रिलो की अलाप ले रहा है। नदियाँ, झरना के प्राकृतिक संगीत में पंचम सूर में गाये जाने वाले रिलो की तान फिर से घूल मिल गई है। मांदर और ढोल की तालों ने अबूझमाड़ियों के पैरों में मानो बिजली सी भर दी है और वे ताल के साथ कदम मिलाकर नृत्य कर रहे हैं। शहर से आने वालों का पहले के जैसा ही मुस्कुरा कर स्वागत कर रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि अबूझमाड़ियों का पँख निकल आया है और पहले जैसा ही उन्मुक्त आकाश में उड़ना चाह रहे हैं। यह सब प्रकृति से प्यार करने वाले और जनजाति संस्कृति से प्यार करने वाले महसूस कर रहे हैं। लोग बेखोफ अबूझमाड़ आ जा रहे हैं। जिला मुख्यालय नारायणपुर से पश्चिम में आश्रम, सोनपुर से आगे मरोड़ा तक सड़क निर्माण का कार्य अन्तिम चरण में है। मरोड़ा से महाराष्ट्र का गढ़चिरोली आसानी से पहुँचा जा सकता है। इसी तरह दक्षिण पश्चिम में बाकुलबाही से आगे आकाबेड़ा, कुतुल होते हुये महाराष्ट्र का चान्दागाँव जाया जा सकता है, सड़क निर्माण का कार्य अपने पूर्णता की ओर है। जिला प्रशासन ने राज्य शासन के निर्देश पर इन मार्गो पर सवारी बस का संचालन कर रही है। जिससे आवागमन सुलभ हो रहा है।
जिला प्रशासन जो बिना सुरक्षा बल के अबूझमाड़ में एक कदम नहीं चल सकता, उसके द्वारा अन्दरूनी क्षेत्रों में लगातार शिविर लगाकर अबूझमाड़ियों के राशन कार्ड और आधार कार्ड बनाये जा रहे है। बहुत से स्थानों में पहली बार स्कूल की घन्टी बजी। कितनी ही शालायें एवं आवासीय विद्यालय स्वतंत्र रूप से संचालित हो रही है। अबूझमाड़ के लोगों को माह भर के राशन के लिये 10 – 15 कि.मी. पैदल चलना नहीं पड़ रहा है। उन्हें जिला प्रशान उनके गाँव में ही राशन दिलवा रही है। निराश्रित पेंसन, वृद्धा पेंसन, विधवा पेंसन आदि के लिये अब भटकना नहीं पड़ता सब गाँव में ही मिल जाता है।