9 किलोमीटर के सफारी मार्ग पर चलेंगी चार जिप्सी, छह स्थानीय युवाओं को गाइड और चालक का प्रशिक्षण

बीजापुर। जिले स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व में करीब तीन दशक बाद एक बार फिर जंगल सफारी शुरू होने जा रही है। 1 नवंबर 2026 से पर्यटक यहां जंगल के प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीवों को करीब से देख सकेंगे। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में शुरू की जा रही इस पहल से जिले में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।
31 मार्च 2026 को वामपंथी उग्रवाद के उन्मूलन की घोषणा के बाद जिले में पर्यटन और विकास की संभावनाओं को लेकर नई पहल की जा रही हैं। इसी कड़ी में इंद्रावती टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी शुरू करने की तैयारी पूरी की गई है। इससे बीजापुर की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन के नक्शे पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
देश का चौथा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व
क्षेत्रफल के लिहाज से इंद्रावती टाइगर रिजर्व देश का चौथा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। वर्ष 1981 में इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था। इसके बाद वर्ष 1982-83 में प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत शामिल किया गया। रिजर्व का कुल क्षेत्रफल 2,799.07 वर्ग किलोमीटर है। इसमें 1,258.37 वर्ग किलोमीटर कोर और 1,540.70 वर्ग किलोमीटर बफर क्षेत्र शामिल है।
यहां बाघ, तेंदुआ, जंगली भैंसा, गौर, चीतल और ऊदबिलाव जैसे वन्यजीवों के साथ भारतीय गिद्ध और सफेद पीठ वाले गिद्ध जैसी दुर्लभ पक्षी प्रजातियां भी पाई जाती हैं। जैव विविधता से समृद्ध यह जंगल पर्यटकों को वन्यजीवों और प्राकृतिक वातावरण को करीब से देखने का अवसर देगा।
9 किमी का सफारी रूट, चार जिप्सी से शुरुआत
पहले चरण में उल्लूर गांव से उंडलापर्ती तक करीब 9 किलोमीटर का सफारी मार्ग निर्धारित किया गया है। पर्यटकों के लिए चार जिप्सी वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। सफारी के लिए प्रति वाहन 2 हजार रुपए शुल्क निर्धारित किया गया है। पर्यटकों की संख्या और पर्यटन गतिविधियों में बढ़ोतरी के आधार पर भविष्य में वाहनों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
छह स्थानीय युवाओं को मिला प्रशिक्षण
सफारी के संचालन में स्थानीय युवाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है। इसके लिए छह युवाओं को गाइड और सफारी वाहन चालक के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। ये गाइड पर्यटकों को जंगल, वन्यजीवों और जैव विविधता से जुड़ी जानकारी देंगे।
सफारी गेट के पास पारंपरिक मिट्टी के घरों की तर्ज पर जलपान गृह भी तैयार किया गया है। यहां पर्यटकों को ग्रामीण परिवेश में स्थानीय व्यंजन और जलपान उपलब्ध कराने की व्यवस्था रहेगी।
होमस्टे और स्थानीय संस्कृति को भी मिलेगा बढ़ावा
जंगल सफारी शुरू होने से गाइड, वाहन चालक, होमस्टे, खान-पान और पर्यटन से जुड़ी अन्य गतिविधियों में स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है। इसके साथ ही स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक व्यंजन, जनजातीय कला और संस्कृति को भी प्रोत्साहन मिलेगा। भविष्य में टाइगर रिजर्व के अन्य क्षेत्रों में भी जंगल सफारी शुरू करने की योजना है।
इंद्रावती टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी की शुरुआत से पर्यटकों को बस्तर की प्राकृतिक विरासत देखने का अवसर मिलेगा। साथ ही स्थानीय समुदायों की आजीविका और जिले की पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।