गणेश चतुर्थी के अवसर पर मूर्तियां बनाकर कमा लिए दो लाख रुपये
जगदलपुर, 14 सितंबर . जब हाथों में हुनर और दिल में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो साधारण सी माटी भी तकदीर संवारने का जरिया बन जाती है। बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड अंतर्गत तारापुर गांव की महिलाओं ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। गणेश चतुर्थी के मौके पर ‘मिट्टी के गणेश मूर्ति निर्माण सिद्धि स्व सहायता समूह’ की इन ग्रामीण महिलाओं ने पर्यावरण के अनुकूल ऐसी मनमोहक प्रतिमाएं गढ़ीं कि बाजार में उनकी कला का डंका बज गया। नतीजा यह हुआ कि चंद हफ्तों की मेहनत से समूह ने एक लाख 80 हजार रुपये की बंपर कमाई कर आत्मनिर्भरता की एक चमकती मिसाल पेश कर दी।
गांव की शांति नागवंशी, दसो भारती और रोमा नागवंशी के नेतृत्व में जब इस समूह की महिलाओं ने मिट्टी सानना शुरू किया था, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यह पहल इतना बड़ा रूप ले लेगी। महिलाओं ने दिन-रात एक करके छोटे-बड़े आकार की कुल 52 ऐसी गणेश प्रतिमाएं तैयार कीं, जिनमें आस्था के साथ-साथ प्रकृति के प्रति सम्मान भी साफ झलकता था। केमिकल और रंगों से दूर, शुद्ध मिट्टी से बनी इन इको-फ्रेंडली मूर्तियों पर खरीदारों की ऐसी नजर ठहरी कि देखते ही देखते पूरा का पूरा स्टॉक हाथों-हाथ बिक गया। इस अप्रत्याशित सफलता ने इन महिलाओं की जिंदगी में उम्मीदों की नई रोशनी भर दी है। अपनी खुशी साझा करते हुए शांति नागवंशी गर्व से कहती हैं कि जब हमारी गढ़ी मूर्तियां लोगों के घरों में पूजी जा रही थीं और हाथ में मेहनत की कमाई आई, तो लगा जैसे वर्षों का सपना पूरा हो गया। इस कमाई से अब वे अपने परिवार की जरूरतें बेहतर तरीके से पूरी कर सकेंगी और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई को नई दिशा दे पाएंगी।
तारापुर की इन हुनरमंद महिलाओं की यह गूंज अब पूरे जिले में सुनाई दे रही है। स्थानीय प्रशासन से लेकर आसपास के गांवों तक, हर कोई इन ‘माटी की हुनरमंद महिलाओं’ की तारीफ कर रहा है। सीमित साधनों के बीच शुरू हुई यह छोटी सी कोशिश आज इलाके की सैकड़ों महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम होने का नया हौसला दे रही है।