विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर हुई तीखी बहस

नगर पालिक निगम जगदलपुर के सभा कक्ष में छत्तीसगढ़ नगर पालिका निगम अधिनियम 1956 की धारा 30 के तहत एक विशेष सम्मिलन बैठक आयोजित की गई। यह बैठक 131वें संविधान संशोधन विधेयक जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 के संसद में पारित नहीं होने के संदर्भ में बुलाई गई थी। बैठक का मुख्य उद्देश्य इस विधेयक के विरोध में खड़े लोगों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करना था।
इस बीच विधेयक के पक्ष में एमआईसी सदस्य सहित भाजपा के सभी पार्षद खुलकर सामने आए। इन जनप्रतिनिधियों ने विधेयक के समर्थन में अपनी बात रखते हुए कहा कि यह कानून महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है और इसका विरोध करना महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ है।
बैठक के दौरान निगम के पार्षदों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। जैसे ही कुछ सदस्यों द्वारा संसद में विपक्ष में बैठे जनप्रतिनिधियों को महिला हितों का विरोधी बताया गया, इतना सुनने पर कांग्रेसी पार्षद सदन से उठकर बाहर चले गए।दरअसल नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% आरक्षण देने से संबंधित एक महत्वपूर्ण संवैधानिक पहल है, जिसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जाता है । इस कानून का उद्देश्य देश की आधी आबादी को राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया में अधिक भागीदारी दिलाना और लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करना है।
विशेष सत्र में वक्ताओं ने कहा कि इस प्रकार के महत्वपूर्ण विधेयक का पारित न हो पाना न केवल महिलाओं के अधिकारों के लिए बाधा है, बल्कि यह लोकतंत्र की समावेशी भावना के भी विपरीत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह समय राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्र निर्माण और महिला सशक्तिकरण के लिए एकजुट होने का था।
बैठक के अंत में निंदा प्रस्ताव रखा गया जो बहुमत के आधार पर पारित किया गया।

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