जगदलपुर, 24 सितम्बर। झीरम घाटी मामले में NIA कोर्ट द्वारा 10 दोषियों को सुनाई गई मृत्युदंड की सजा को बचाव पक्ष ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। बचाव पक्ष के वकील अरविंद चौधरी ने दोषियों के परिजनों से चर्चा के बाद अपील की अर्जी दायर की है। अब बचाव पक्ष को हाईकोर्ट की ओर से नोटिस जारी होने का इंतजार है।
झीरम घाटी हत्याकांड मामले में करीब 13 साल बाद अदालत ने सजा का ऐलान किया था। जिसमें विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने बुधवार को सजा पर फैसला सुनाया था। जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने मामले में दोषी ठहराए गए सभी 10 आरोपियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। 5 सितंबर को अदालत ने मामले में सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा के निर्धारण के लिए 16 सितंबर की तारीख तय की गई थी। बुधवार को अदालत ने सभी दोषियों को फांसी की सजा सुनाई।
इस मामले में दोषी ठहराए गए आरोपियों में प्रमिला मोडियाम, सुमित्रा पुनेम, मुक्का मांडवी, मड़कामी देवा, कोसा कवासी, आयत मरकाम, बंजामी सेना, चैतू लेकाम, जोगा मड़कामी और महादेव नागा शामिल हैं। सभी आरोपी वर्तमान में केंद्रीय जेल में बंद हैं। मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई थी। ट्रायल के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई थी, जिसके बाद शेष 10 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी रही। NIA ने वर्ष 2015 में करीब 1000 पन्नों की चार्जशीट पेश की थी और मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए।
25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ का काफिला सुकमा के दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी से गुजर रहा था। इसी दौरान घात लगाए बैठे माओवादियों ने काफिले को निशाना बनाया। NIA के रिकॉर्ड के अनुसार करीब शाम 4:15 बजे हमला हुआ, जिसमें माओवादियों ने काफिले पर हमला कर भारी गोलीबारी की। हमले में 29 लोगों की मौत और 38 लोग घायल हुए थे। NIA के मुताबिक हमलावरों ने हथियार और अन्य सामान भी लूटे थे।
झीरम हमले में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कई शीर्ष नेता मारे गए। इनमें तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं बस्तर के वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व विधायक उदय मुदलियार और विधायक योगेंद्र शर्मा प्रमुख नाम हैं। हमले में सुरक्षा बलों के जवानों और अन्य कार्यकर्ताओं की भी जान गई। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार विद्याचरण शुक्ल हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे और बाद में 11 जून 2013 को उनका निधन हुआ।