हस्तशिल्प एवं हथकरघा की प्रदर्शनी अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में विफल

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बस्तर, जगदलपुर – हस्तशिल्प बोर्ड द्वारा 15 से 24 अप्रैल तक बस्तर संभाग के प्रतिभावान शिल्पकारों की कला को प्रदर्शित करने वाली भव्य प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है जो मिशन ग्राउण्ड में आयोजित की जा रही है। हालांकि, यहां शाम को लोगों की भीड़ नदारद रहती है इससे समझ आता है कि यह कार्यक्रम जनता को आकर्षित करने में विफल रहा, जिससे बिना वजह पैसे बबार्द हो रहें हैं ।

प्रदर्शनी के प्रभारी मरावी ने बताया कि बोर्ड ने लगभग रु. 10 हजार रूपए कार्यक्रम की मेजबानी के लिए प्रतिदिन खर्च हो रहें है।

आयोजन को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों के बावजूद, कोई महत्वपूर्ण भीड़ नहीं देखी गई । प्रदर्शनी का उद्देश्य हस्तशिल्प उद्योग को बढ़ावा देना और स्थानीय कारीगरों को एक मंच प्रदान करना है। , लोगों की भीड़ नहीं होने से कार्यक्रम का उद्देश्य विफल हो गया। जिन कलाकारों ने अपने काम का प्रदर्शन किया, उन्होंने अपनी रचनात्मकता के प्रति खराब प्रतिक्रिया पर निराशा भी देखने को मिल रही है। मरावी के मुताबिक दूरदराज से आए कलाकार अपने साथ लगे स्टालों में ही रात गुजारते है।

प्रदर्शनी में ढोकरा, काष्ठ, लौह, गोदना, छिंद कासा, कालीन, इत्यादि के नायाब कलाकृतियों का नमूना देखने को मिल सकता है । मगर सरकारी उदासीनता के चलते एक भी दर्शक इसे निहारने नहीं आया । 24 अप्रेल को इसका समापन होने की उम्मीद है। लेकिन जनता की प्रतिक्रिया की कमी ने आयोजकों और कलाकारों के हौसले को पस्त कर दिया है।
22 अप्रेल की ये तस्वीरें बता रही है कि यह प्रर्दशनी केवल पैसे की बबार्दी के सिवा कुछ नहीं है। अंत में, सार्वजनिक प्रतिक्रिया की कमी के कारण हस्तकला बोर्ड की प्रदर्शनी अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में विफल रही। यह सुनिश्चित करने के लिए हस्तशिल्प उद्योग को बढ़ावा देने और समर्थन करने के लिए बेहतर तरीकों का पता लगाना आवश्यक है कि कारीगरों की मेहनत बेकार न जाए।

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