-शैलेन्द्र पांडे
जगदलपुर। करकपाल रेलवे पटरी के समीप स्थित सती माता मंदिर क्षेत्र के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां विशेष रूप से आमुस (अमावस्या) पर्व के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु सती माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों के बीच लंबे समय से यह मान्यता चली आ रही है कि आमुस पर्व के दिन सती माता के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मन्नत एक वर्ष के भीतर जरूर पूरी होती है। इसी आस्था के चलते दूर-दराज के गांवों से भी लोग अपनी मनोकामना लेकर मंदिर पहुंचते हैं।
श्रद्धालु मंदिर में पूजा-अर्चना कर अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और कुशलता की कामना करते हैं। कई लोग व्यक्तिगत समस्याओं के समाधान, परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य, रोजगार, संतान और अन्य मनोकामनाओं को लेकर सती माता के समक्ष प्रार्थना करते हैं। मन्नत पूरी होने के बाद श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार मंदिर परिसर में आकर धार्मिक परंपरा के अनुसार आभार व्यक्त करते हैं।
मन्नत पूरी होने पर निभाई जाती है परंपरा
स्थानीय मान्यता के अनुसार मन्नत पूरी होने पर कुछ श्रद्धालु बकरा, मुर्गा, बतख आदि पशु-पक्षियों की बलि चढ़ाते हैं। यह परंपरा श्रद्धालुओं की व्यक्तिगत आस्था और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हुई है। बलि के बाद पशु के मांस को वहीं पकाकर प्रसाद अथवा सामूहिक भोजन के रूप में ग्रहण करने की परंपरा बताई जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार इसे घर ले जाने की बजाय मंदिर स्थल पर ही पकाकर खाने की मान्यता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि भोजन अधिक तैयार हो जाता है और बच जाता है, तो उसे घर ले जाने के बजाय वहीं जमीन में गड्ढा खोदकर दबा दिया जाता है। इसे भी सती माता के प्रति आस्था और पुरानी परंपरा का हिस्सा माना जाता है।
परिवार की खुशहाली के लिए करते हैं पूजा
सती माता के मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं का मुख्य उद्देश्य केवल मन्नत मांगना ही नहीं, बल्कि अपने परिवार की खुशहाली और सुरक्षा की कामना करना भी होता है। पर्व के अवसर पर महिलाएं और पुरुष अपने परिवार के साथ मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं। कई श्रद्धालु वर्षों से चली आ रही पारिवारिक परंपरा के अनुसार इस स्थल पर पहुंचते हैं और मन्नत पूरी होने पर दोबारा माता के दरबार में उपस्थित होकर अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं।
स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार सती माता मंदिर से जुड़ी मान्यताएं पीढ़ियों से लोगों के बीच चली आ रही हैं। यही कारण है कि आमुस पर्व के दौरान मंदिर और आसपास का क्षेत्र श्रद्धालुओं की आवाजाही से गुलजार रहता है। आस्था के इस केंद्र में लोग अपनी-अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा करते हैं और सती माता से परिवार की सुख-समृद्धि तथा वर्षभर मंगल की कामना करते हैं।