साहब, पहले धुंधला दिखता था, अब साफ नजर आता है’—कलेक्टर ने जाना वनांचल के मरीजों का हाल

जिला अस्पताल बना उम्मीदों का केंद्र: कलेक्टर ने परखी व्यवस्थाएं, मरीजों से आत्मीय संवाद

मोतियाबिंद से लेकर सोनोग्राफी तक, मरीजों को मिल रहा निःशुल्क व गुणवत्तापूर्ण इलाज

 

सुकमा/ धुर नक्सल प्रभावित और दूरस्थ वनांचल के रूप में पहचाने जाने वाले सुकमा जिले में अब स्वास्थ्य सेवाओं का एक मानवीय और संवेदनशील चेहरा सामने आ रहा है। शनिवार शाम कलेक्टर श्री अमित कुमार ने जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण कर ज़मीनी व्यवस्थाओं की नब्ज़ टटोली। सिविल सर्जन डॉ. एम. आर. कश्यप, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ खुशबू देवांगन के साथ उन्होंने ओपीडी, नेत्र विभाग, मातृ एवं शिशु वार्ड और एक्स-रे कक्ष का सघन मुआयना किया। इस दौरान कलेक्टर किसी प्रशासनिक अधिकारी की तरह नहीं, बल्कि एक अभिभावक की भूमिका में दिखे, जिन्होंने सीधे ग्रामीणों के पास बैठकर उनके स्वास्थ्य और अस्पताल में मिल रही सुविधाओं की आत्मीय जानकारी ली।

नेत्र रोग विभाग में उस समय एक सुखद और भावुक दृश्य देखने को मिला, जब कोंटा के सुदूर मेटागुड़ा गांव से आए ग्रामीण मड़कम अंका ने दोनों आंखों के सफल मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद अपनी नई रोशनी का अनुभव साझा किया। अंका ने कलेक्टर श्री अमित कुमार को बताया, “साहब, पहले चारों तरफ बस धुंधलापन था, अब सब साफ-साफ दिखता है। यहां रहने और खाने की भी बहुत अच्छी व्यवस्था है।” कलेक्टर ने वनांचल से आए अन्य मरीजों से भी संवाद कर उनका हौसला बढ़ाया और चिकित्सकों को निर्देशित किया कि दूर-दराज के किसी भी जरूरतमंद को इलाज के लिए भटकना न पड़े।

अस्पताल के एक्स-रे कक्ष में जगरगुंडा के रहने वाले सुंदरू, जो पैर में फ्रैक्चर के इलाज के लिए पहुंचे थे, से कलेक्टर ने सीधे बात की और डॉक्टरों को तत्काल समुचित उपचार मुहैया कराने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी तकनीकी रुकावट को रोकने के लिए उन्होंने मौके पर ही पर्याप्त एक्स-रे फिल्मों और आवश्यक दवाओं के स्टॉक की समीक्षा की। इस त्वरित प्रशासनिक संवेदनशीलता ने स्पष्ट कर दिया कि शासन की प्राथमिकता कतार में खड़े सबसे अंतिम व्यक्ति को गुणवत्तापूर्ण और त्वरित राहत दिलाना है।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में अस्पताल की सोनोग्राफी सुविधा एक बड़ा वरदान साबित हो रही है। विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा किए जा रहे परीक्षणों के दौरान कलेक्टर ने पाया कि पंजीकृत 149 गर्भवती महिलाओं में से 45 का सुरक्षित परीक्षण हो चुका था। चिंतलनार की श्रीमती पुष्पा और नागुलगुंडा की श्रीमती मुये जैसी कई वनांचली माताओं ने पहली बार सोनोग्राफी कराई। अपने गर्भस्थ शिशु की स्थिति जानकर उनके चेहरों पर राहत और खुशी साफ झलक रही थी। महिलाओं ने अस्पताल में भोजन-पानी के उम्दा इंतज़ामों की सराहना करते हुए कहा कि पहले ऐसी जांचों के लिए बाहर जाना पड़ता था, पर अब अपने ही जिले में यह सुविधा जीवन रक्षक साबित हो रही है।

निरीक्षण के अंतिम चरण में कलेक्टर ने अस्पताल परिसर में आकार ले रहे 50 बिस्तरों वाले नवीन ट्रॉमा सेंटर के लेआउट और डिजाइन का गहन अवलोकन किया। उन्होंने निर्माण कार्य में गति लाने के स्पष्ट निर्देश दिए, ताकि सड़क दुर्घटनाओं और गंभीर आपातकालीन मामलों में ग्रामीणों को समय पर अत्याधुनिक आपात चिकित्सा सुकमा में ही उपलब्ध हो सके। संवेदनशील निगरानी, विशेषज्ञ डॉक्टरों की मौजूदगी और बुनियादी ढांचे के इस विस्तार ने यह साबित कर दिया है कि जिला प्रशासन का संकल्प सुकमा के हर नागरिक को सम्मानजनक व उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवा देना है।

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