
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में करीब 13 साल बाद बुधवार को जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। 25 मई 2013 को हुए इस हमले में 27 लोगों की मौत हुई थी। मृतकों में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके पुत्र दिनेश पटेल, बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और उदय मुदलियार समेत कई नेता, कार्यकर्ता और सुरक्षाकर्मी शामिल थे। मामले में 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे।
मृत्युदंड पाने वाले दोषियों में प्रमिला मोडियम, चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना, सुमित्रा उर्फ सुमित्रा पुनेम मोडियम, मुक्का मंडावी, कोसा कवासी उर्फ कोसाराम, आयता मरकाम, मड़कमि देवा, जोगा मड़कमि, बंजामी सन्ना उर्फ चमरू उर्फ डेंगा और महादेव नाग शामिल हैं।
इस मामले में आरोपियों के खिलाफ IPC की कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा चला, जिनमें धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), 121 (भारत सरकार के खिलाफ युद्ध), 121-A (युद्ध की साजिश), 396 (डकैती के दौरान हत्या), 397 (घातक हथियार के साथ डकैती/लूट) और 120-B (आपराधिक साजिश) प्रमुख हैं। इसके अलावा Arms Act, Explosive Substances Act और UAPA की धाराएं भी लगाई गई थीं।
5 सितंबर 2026 को अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था और 16 सितंबर को सजा सुनाने की तारीख तय की गई थी। अब मृत्युदंड के इस फैसले के बाद दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील और सजा की पुष्टि की कानूनी प्रक्रिया का रास्ता रहेगा।