बस्तर के युवा हालाकान
परीक्षापूर्व प्रशिक्षण का कारनामा
जगदलपुर/ बस्तर अंचल के युवाओं को कर्मचारी चयन आयोग और बैंकिंग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने के लिए संचालित सरकारी संस्था परीक्षापूर्व प्रशिक्षण केन्द्र, जगदलपुर शासन-प्रशासन की सुस्ती का शिकार हो गई है। मई महीने में आयोजित चयन परीक्षा का परिणाम अगस्त का मध्य बीत जाने के बाद भी घोषित नहीं किया गया है। नतीजतन, नए सत्र की कक्षाएं अब तक शुरू नहीं हो सकी हैं।
नियमानुसार, राजीव युवा उत्थान योजना के तहत संचालित इस 6 महीने के निशुल्क कोचिंग कार्यक्रम की कक्षाएं हर हाल में जून महीने में शुरू हो जानी चाहिए थीं। लेकिन अगस्त बीतने को है और परिणाम का कोई अता-पता नहीं है।
100 सीटों के लिए होना है चयन
जगदलपुर कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस योजना के अंतर्गत कुल 100 सीटें निर्धारित हैं, जिनमें आरक्षण नियमों के तहत
अनुसूचित जनजाति 50 सीटें
अनुसूचित जाति 30 सीटें
अन्य पिछड़ा वर्ग 20 सीटें
महिला आरक्षण सभी श्रेणियों में कुल 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
शासन की अनुमति के इंतजार में अटका छात्रों का भविष्य
बस्तर जैसे सुदूर और आदिवासी बहुल क्षेत्र के 100 होनहार युवाओं का भविष्य तय करने में शासन और सुशासन का दावा करने वाली सरकार की ढिलाई पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जब इस पूरी देरी के बारे में जिम्मेदार अधिकारियों से बात की गई, तो उनका कहना है कि परिणाम जारी करने के लिए अभी तक शासन (सरकार) से अनुमति प्राप्त नहीं हुई है।
अधिकारियों के इस टालमटोल भरे जवाब से साफ है कि प्रशासनिक लालफीताशाही के कारण बस्तर के युवाओं का एक-एक कीमती महीना बर्बाद हो रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि जब प्रतियोगी परीक्षाओं की तिथियां नजदीक आ रही हैं, ऐसे में अनुमति के नाम पर 100 छात्रों की कोचिंग अटकाए रखना कहां तक न्यायसंगत है? क्षेत्र के छात्रों और अभिभावकों ने जल्द से जल्द परिणाम जारी कर कक्षाएं शुरू करने की मांग की है।