पांच महिला नक्सली भी शामिल, झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ और बीजापुर पुलिस के समन्वय से मुख्यधारा में लौटे कैडर
बीजापुर। झारखंड राज्य में सक्रिय प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन के आठ माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर बुधवार को झारखंड पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के सहयोग से बीजापुर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वालों में पांच महिला माओवादी शामिल हैं। इन सभी पर कुल 49 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
एसपी उमेश प्रसाद गुप्ता ने बताया आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादी लंबे समय से झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों में संगठन के लिए सक्रिय थे। सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव, संगठन की लगातार कमजोर होती स्थिति, उसकी हिंसक एवं जनविरोधी विचारधारा से मोहभंग, पूर्व नक्सलियों के सफल पुनर्वास तथा आदिवासी क्षेत्रों में तेजी से हो रहे विकास कार्यों से प्रभावित होकर उन्होंने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
आत्मसमर्पण करने वालों में दक्षिण जोनल कमेटी के डीवीसीएम एवं जेडसीएम अश्विन उर्फ लच्छू (आठ लाख रुपये), दक्षिण जोनल कमेटी के सरांडा सब जोनल कमेटी सदस्य एवं डीवीसीएम रंगा उर्फ सोहन (आठ लाख रुपये), सरांडा सब जोनल कमेटी के डीवीसीएम दोबा माड़वी उर्फ राहत (आठ लाख रुपये), कोल्हान एरिया कमेटी की एसीएम फगनी पोयम उर्फ रजनी (पांच लाख रुपये), सूरज मुन्नी चम्पिया उर्फ सुबनी (पांच लाख रुपये), हिड़मे कड़ती उर्फ रीता (पांच लाख रुपये), बुधरी कुंजाम उर्फ अनुषा (पांच लाख रुपये) तथा ईआरबी स्टॉप पार्टी सदस्या एवं सीसीएम ईआरबी सचिव मिसिर बेसरा की सुरक्षा गार्ड सदस्य सलमी चम्पिया उर्फ जिलानी (पांच लाख रुपये) शामिल हैं।
पुलिस ने बताया कि सभी आत्मसमर्पित कैडरों को छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत नियमानुसार आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा, स्वरोजगार और रोजगार संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि वे सम्मानपूर्वक समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर नया जीवन प्रारंभ कर सकें।
पुलिस के अनुसार, इस आत्मसमर्पण की सफलता में झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ और बीजापुर पुलिस के बीच बेहतर समन्वय, विश्वास निर्माण तथा संवेदनशील कार्यशैली की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जिला प्रशासन और पुलिस आत्मसमर्पित कैडरों के स्थायी एवं सम्मानजनक पुनर्वास के लिए निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग उपलब्ध कराएंगे।