जगदलपुर . नारायणपुर – अबूझमाड़ में नक्सलवाद का प्रभाव कम होने के बाद प्राकृतिक पर्यटन स्थलों की ओर लोगों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। बारिश शुरू होते ही कच्चापाल वाटरफॉल पर्यटकों से गुलजार है, लेकिन रविवार को यहां हुई एक घटना ने पर्यटन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। झरने के नीचे पिकनिक मना रहे पर्यटकों द्वारा भोजन बनाने के लिए आग जलाने और तेज आवाज में बड़े स्पीकर बजाने के दौरान अचानक मधुमक्खियों का झुंड बेकाबू होकर लोगों पर टूट पड़ा। कुछ ही पलों में खुशियों का माहौल चीख-पुकार और अफरा-तफरी में बदल गया। जान बचाने के लिए लोग इधर-उधर भागते नजर आए, जबकि कई पर्यटक मधुमक्खियों के डंक से घायल हो गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ पर्यटक झरने के नीचे लकड़ियां जलाकर भोजन बना रहे थे। इसी दौरान वहां बड़े स्पीकर पर तेज आवाज में संगीत भी बजाया जा रहा था। आग के धुएं और तेज ध्वनि से उत्पन्न कंपन के कारण पास में मौजूद मधुमक्खियों के छत्ते प्रभावित हो गए। इसके बाद बड़ी संख्या में मधुमक्खियां झुंड बनाकर वहां मौजूद लोगों पर हमला करने लगीं। अचानक हुए हमले से भगदड़ जैसी स्थिति बन गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए जंगल और चट्टानों की ओर भागने लगे।
घटना में कई पर्यटकों के चेहरे, हाथ और शरीर के अन्य हिस्सों पर मधुमक्खियों ने डंक मारे, जिससे उन्हें सूजन और तेज दर्द की शिकायत हुई। हालांकि किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है, लेकिन इस घटना ने पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा और अनुशासन की जरूरत को उजागर कर दिया है।
घटनास्थल पर मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि झरने के पास कुछ लोग बड़े स्पीकर लेकर पहुंचे थे और काफी तेज आवाज में संगीत बजा रहे थे। उसी समय आग भी जलाई गई थी। उनका कहना है कि स्पीकर से उत्पन्न तेज कंपन और आग के धुएं से मधुमक्खियों का झुंड अचानक आक्रामक हो गया और लोगों को काटने दौड़ पड़ा। प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, यदि समय रहते लोग वहां से नहीं भागते तो हादसा और भी बड़ा हो सकता था।