जगदलपुर, 04 मई . वार्ता / होटल देवांश में कल शाम शब्दोत्सव पुस्तक लोकार्पण समारोह में स्थानीय कवयित्री नवनीत कमल द्वारा रचित पांच काव्य संग्रहो का लोकार्पण किया गया । लोकार्पण कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी साहित्य भारती के अध्यक्ष बलदाऊ राम साहू ने की । वहीं समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार हिमांशु शेखर झा मौजूद थे । विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो योगेंद्र मोतीवाला ,प्रो महमूद अली,श्रीमती उर्मिला आचार्य उपस्थित थे ।
समारोह में नवनीत जी के कविता संग्रह “स्मृतियों के मृग” की समीक्षा शरद चंद्र गौर ने की। उन्होंने कहा कवयित्री की हिंदी में योगदान सराहनीय है संग्रह की प्रत्येक कविता पठनीय है। “रोशनी से भर गया मन “, गीतिका संग्रह की समीक्षा करते हुए ख्याति प्राप्त समीक्षक खुदेजा खान ने कहा “संग्रह में नवनीत कमल जी की सकारात्मक आशावादी दृष्टिकोण परिलक्षित होता है”दार्शनिक गहराई दिखाई पड़ती है। इसी तरह डॉ योगेंद्र मोतीवाला ने “ताड़ वनों के बीच” दोहा संग्रह की समीक्षा करते हुए कहा “नवनीत कमल की लेखन शैली को काव्यात्मक अनुराग की सहज भावानुभूति कहा है”
डॉ पूर्णिमा सरोज ने कहा “एक नदी सा मन “में गीतकार के रूप में नवनीत कमल जी ने शब्द के उस पार जाकर भावनाओं की अभिव्यक्ति दी है । विशिष्ट अतिथि ख्याति प्राप्त कथाकार सुश्री उर्मिला आचार्य ने कहा “नवनीत कमल के गीत शब्दों से संवाद करते हैं”काव्य में छंद शास्त्र का पालन करने वाली यह बस्तर की पहली रचनाकार है।
और नवीतम खंड काव्य ” पद्म पयोधी”पर विमर्श करते हुए प्रोफेसर अली सर ने कहा कि पद्म पयोधि लेखिका की बायोग्राफी है”
मुख्य अतिथि हिमांशु शेखर झा जी ने नवनीत कमल की समग्र साहित्य पर प्रकाश डालते हुए पद्म पयोधि खंडकाव्य को लक्ष्मीनारायण पयोधि जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर लिखा गया अनुपम काव्य संग्रह कहा” इसी क्रम में अध्यक्ष की आसंदी पर विराजे श्री बलदाऊ राम साहू जी ने समग्र रूप से कार्यक्रम की व्यवस्था की सराहना करते हुए हुए छंद बद्ध साहित्य की उपयोगिता पर बल दिया।
इस दौरान उन्होंने कहा कि मैं पहले पयोधि जी को केवल बाल साहित्यकार के रूप में जानता था किंतु जब मैं फेस बुक में उनके द्वारा लिखित कविताओं को पढ़ा तो तब मुझे यह महसूस हुआ कि जनजातीय संस्कृति में तो पयोधि जी की जबरदस्त पकड़ है । दिक्कत यह है कि हम अपने लोगों को पहचान नहीं पाते हैं और उचित सम्मान नहीं दे पाते हैं । कार्यक्रम की एक विशेष बात यह भी है कि इस कार्यक्रम में लक्ष्मी नारायण पयोधि जी की माता श्रीमती गंगा देवी ताटी एवं नवनीत कमल की माता तोटा सत्यवती राव ,ख्याति प्राप्त चित्रकार श्री बंसीलाल विश्वकर्मा जी,श्री राम नारायण ताटी जी,का सम्मान अंग वस्त्र पुष्पगुच्छ एवं स्मृति देकर सम्मानित किया गया। उपस्थित पत्रकारों का भी सम्मान हुआ।
कार्यक्रम में बहुत बड़ी संख्या में साहित्य अनुरागी उपस्थित थे जिनमें प्रमुख रूप से सुभाष पांडे जी, रुद्र नारायण पाणिग्रही जी,यस.करीमुद्दीन जी,अवध किशोर शर्मा जी,जगदीश चंद्र दास जी सतीश जैन जी,विनय श्रीवास्तव जी,विपिन बिहारी दास जी,अनीता राज जी,सुश्री कस्तूरी मिश्रा जी, सुषमा झा जी,उषा चिखली कर जी,शुभ्रा कुंडू जी,स्मृति मिश्रा,मीनाक्षी जोशी,अनिल शुक्ला जी,आशा पटनायक जी ,शिरीष टिकरिहा जी,निर्मल सिंह राजपूत जी,चमेली सुहासिता जी पूर्णिमा देहारी जी,जमुना ठाकुर जी ओम प्रकाश चंद्रवंशी जी, अतुल शुक्ला जी हरेंद्र सिंह राजपूत जी,बहन सुजाता नायडू, दिगंबर राव नायडू जी एवं और भी बड़ी संख्या में साहित्यकार उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के प्रारंभ में शारदे वंदना की प्रस्तुति देवश्री गोयल के द्वारा किया गया, लेखिका के जीवन परिचय का पठन भी देवश्री के द्वारा ही किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन श्रीमती कविता बिजोलिया एवं पंडित राम रजनीश वाजपेई के द्वारा किया गया, एवं आभार ज्ञापन लेखिका के पुत्र श्री स्नेहिल कमल के द्वारा किया गया।