सुकमा. जिले में इस वर्ष गर्मी ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। अप्रैल महीने में ही चिलचिलाती धूप और लू (हीटवेव) के थपेड़ों ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। सुकमा का तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है, जिसे स्थानीय बुजुर्ग पिछले 50 वर्षों की सबसे भीषण गर्मी बता रहे हैं।
प्रशासन की एडवायजरी: अति आवश्यक होने पर ही निकलें बाहर
बढ़ते तापमान और लू के खतरे को देखते हुए जिला कलेक्टर ने आदेश जारी कर आमजन से सावधानी बरतने की अपील की है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक, जब तक कोई अति आवश्यक कार्य न हो, लोग घरों से बाहर न निकलें। विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों को धूप से बचाने की हिदायत दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने समय-समय पर तरल पदार्थों (पेय जल, ओआरएस) का सेवन करने की सलाह दी है।
सड़कों पर सन्नाटा, व्यापार पर पड़ा असर
भीषण गर्मी का असर अब सुकमा के बाजारों और सड़कों पर साफ दिखने लगा है। ठेले पर सब्जी बेचने वाले सुरेंद्र गुप्ता ने बताया कि “ऐसी गर्मी पहले कभी नहीं देखी। लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं, जिससे धंधा पूरी तरह मंदा पड़ गया है।” 50 वर्षों से सुकमा में रह रहे स्थानीय निवासी सुशील शर्मा कहते हैं कि अप्रैल के महीने में सुबह से ही पारा इतना चढ़ जाना अकल्पनीय है।
अंतरराज्यीय बस स्टैंड पर यात्री परेशान, पानी का अभाव
गर्मी का सबसे बुरा असर सुकमा के अंतरराज्यीय बस स्टैंड पर देखने को मिल रहा है। यहाँ से आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा के लिए बसों का संचालन होता है, लेकिन यात्री संख्या में भारी गिरावट आई है।
बस बुकिंग एजेंट राजेश साहू ने बताया कि भीषण गर्मी के कारण लोग यात्रा करने से कतरा रहे हैं। वहीं, उन्होंने बस स्टैंड की अव्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि “इस भीषण गर्मी में बस स्टैंड पर पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है। सुकमा एक आदिवासी बहुल क्षेत्र है, यहाँ अंदरूनी इलाकों से आने वाले गरीब ग्रामीण पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं।
मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल अगले कुछ दिनों तक गर्मी से राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। हीटवेव का प्रकोप जारी रहेगा, जिससे आने वाले दिनों में पारा और अधिक बढ़ सकता है।
बचाव के मुख्य उपाय:
दोपहर 10 से 3 बजे तक धूप में निकलने से बचें।
सूती और ढीले कपड़े पहनें, सिर को कपड़े या छाते से ढंककर रखें।
पर्याप्त मात्रा में पानी, छाछ और नींबू पानी का सेवन करें।
चक्कर आने या घबराहट होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
सुसीला शर्मा ने बताया कि आज 50 वर्ष सुकमा में हो गये ऐसी गर्मी कभी नही बड़ी सुबह 7 बजे से ही सूरज आग जैसे तपने लगता है गर्मी से बेहाल हो जाये है अप्रैल महीने में ऐसा कभी नही इतनी गर्मी पड़ी है.
उपेन्द्र गुप्ता ने बताया की ऐसी गर्मी नही नही देखी है हम घर घर ठेले से सब्जी ले जाते है लोगो की भी घर तक पहुँच जाते है लोगो को घर पर सब्जी मिल जाती है हमारा भी घर चल जाता है