जगदलपुर, 6 अप्रैल . बस्तर के सुदूर वनांचलों और ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन ने एक अत्यंत मानवीय और संवेदनशील कदम उठाया है। कलेक्टर श्री आकाश छिकारा के विशेष मार्गदर्शन में जिले की गर्भवती महिलाओं, विशेषकर हाई रिस्क प्रेगनेंसी यानी उच्च जोखिम वाले प्रसव के मामलों की सटीक पहचान के लिए अब निःशुल्क अल्ट्रासोनोग्राफी जांच की सुविधा सुनिश्चित की गई है। प्रशासन की इस सराहनीय पहल का मुख्य उद्देश्य यह है कि आर्थिक रूप से अक्षम परिवारों की माताओं को भी आधुनिक नैदानिक सुविधाएं मिल सके, ताकि गर्भधारण के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी चिकित्सीय जटिलता का सही समय पर पता लगाकर उसका त्वरित निदान किया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से संचालित इस विशेष अभियान के तहत न केवल उच्च जोखिम वाली स्थितियों की समय रहते पहचान होगी, बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु की सुरक्षा को भी एक नया सुरक्षा कवच मिलेगा। प्रायः देखा जाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर उच्च स्तरीय जाँच न हो पाने के कारण अंतर्गर्भाशयी मृत्यु, मृत जन्म, गर्भपात और समय से पूर्व प्रसव जैसी चुनौतियां सामने आती हैं, लेकिन अब आधुनिक जाँच सुविधा के इस विस्तार से इन गंभीर समस्याओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा। यह प्रयास अंततः मातृ मृत्यु दर में कमी लाने और सुरक्षित प्रसव की दर को बढ़ाने में एक मील का पत्थर साबित होगा।
इस महत्वपूर्ण और जीवन रक्षक जाँच प्रक्रिया को सुलभ बनाने के लिए जिला प्रशासन ने एक स्मार्ट रणनीति अपनाते हुए शहर के निजी स्वास्थ्य संस्थानों और डायग्नोस्टिक सेंटरों के साथ अनुबंध किया है, जिससे अब क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को जाँच के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। इसी कड़ी में जमीनी स्तर पर सफलता दिखनी भी शुरू हो गई है, जहाँ बस्तर विकासखंड की 20 और जगदलपुर शहरी क्षेत्र की 15 गर्भवती महिलाओं को इस सुविधा का लाभ मिलना तय हुआ है। इसके साथ ही दरभा विकासखंड की 12 गर्भवती महिलाओं सहित बकावंड विकासखंड की 2 और जगदलपुर विकासखंड के ग्रामीण क्षेत्र नानगुर की 2 गर्भवती महिलाओं को भी शामिल किया गया है। जिला प्रशासन की यह संवेदनशीलता न केवल बस्तर में बेहतर होते स्वास्थ्य ढांचे को प्रदर्शित करती है, बल्कि यह जच्चा और बच्चा दोनों के सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक प्रयास है।