बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की परख

 

बीजापुर। छत्तीसगढ़ राज्य मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष गिरधारी नायक ने अपने प्रवास के दौरान बीजापुर के विभिन्न शैक्षणिक एवं पुनर्वास संस्थानों का औचक निरीक्षण कर शिक्षा की गुणवत्ता, पौष्टिक आहार एवं उपलब्ध सुविधाओं का विस्तृत जायजा लिया।
बाल देखरेख संस्थान में आत्मीय संवाद

अध्यक्ष नायक ने बाल देखरेख संस्थान पहुंचकर यहां दर्ज बच्चों की पारिवारिक पृष्ठभूमि की जानकारी ली। उन्होंने बेसहारा बच्चों को शिक्षा, पोषण एवं बेहतर जीवन उपलब्ध कराने के प्रयासों के लिए जिला प्रशासन की सराहना की। बच्चों से संवाद करते हुए संस्थान में मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। इस दौरान बच्चों ने अपने हाथों से बनाए गुलदस्ते भेंट कर उनका आत्मीय स्वागत किया। बच्चों ने एक स्वर में पढ़-लिखकर आगे बढ़ने और जीवन में सफल बनने का संकल्प व्यक्त किया।

कन्या शिक्षा परिसर में शैक्षणिक गुणवत्ता की समीक्षा

एजुकेशन सिटी स्थित कन्या शिक्षा परिसर में अध्यक्ष नायक ने छात्राओं से हिंदी एवं अंग्रेजी की पुस्तकों का वाचन कराया। छात्राओं ने आत्मविश्वास के साथ न केवल पाठ पढ़ा बल्कि उसकी व्याख्या भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत की। नायक ने छात्राओं की प्रतिभा, अनुशासन और आत्मविश्वास की सराहना करते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने पर बल दिया।

समर्थ दिव्यांग पुनर्वास केंद्र का निरीक्षण

इसी परिसर में स्थित समर्थ दिव्यांग पुनर्वास केंद्र में उन्होंने दिव्यांग बच्चों के साथ समय बिताया और उनकी गतिविधियों का अवलोकन किया। भोजन व्यवस्था, शयन कक्ष, संवेदी कक्ष, फिजियोथेरेपी कक्ष सहित विभिन्न प्रशिक्षण कक्षों का निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने दिव्यांग बच्चों के समग्र विकास के लिए संवेदनशील एवं समावेशी वातावरण की आवश्यकता पर जोर दिया।

बच्चों के हौसले से अभिभूत

शैक्षणिक संस्थानों के बच्चों के बुलंद हौसले और आत्मविश्वास से अभिभूत होकर श्री नायक ने कहा कि वर्षों से अशिक्षा और माओवाद के अंधेरे से जूझता रहा बीजापुर अब सुनहरे भविष्य की ओर अग्रसर है। बच्चों के मानव अधिकारों की रक्षा और उनके अधिकारों के संरक्षण से जिले में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि अब बीजापुर विकसित बीजापुर की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस दौरान कलेक्टर संबित मिश्रा एवं पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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