भारतीय संविधान की रोचक जानकारियों से दर्शक रूबरू हुए
विधायक नीलकण्ठ टेकाम ने सराहा
दूर-दराज से लोग देखने आए थे
केशकाल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मौके पर केशकाल के शिप्रा विद्यालय ने एक नायाब चित्र पर्दशनी का आयोजन किया जिसकी चर्चा करते लोग नहीं थक रहें है। इस प्रर्दशनी में भारतीय संविधान के उस वक्त के 251 पेजों और संविधान निर्माण को लेकर रोचक जानकारियां दी गई । एक शिक्षक कहते है इसके लिए बड़ी तैयारियां हुई हम लम्बे समय से लगे हुए थे। प्रर्दशनी देखने आए एक अभिभावक के मुताबिक संविधान निर्माण के बारे में पूरी जानकारी बताई गई । इस प्रदर्शनी को पूर्व आई ए एस एवं क्षेत्रिय विधायक नीलकण्ठ टेकाम ने खूब सराहा।
शिप्रा विद्यालय के सचिव राना मुखर्जी कहते हैं -“पूर्व में यह बच्चों के प्रोजेक्ट का हिस्सा था। बाद में हमने जनमानस को संविधान के बारे में जानकारी देने के उद्देश्य से प्रर्दशनी में परिवर्तित किया । उस वक्त की तस्वीरों को जुटाना और उन्हें पिरोना आसान काम नहीं है। बच्चों और शिक्षकों ने कर दिखाया । “
जब संविधान बना तब यह 251 पेजों का था अब यह 470 से 500 पेजों का हो गया है ।
प्रर्दशनी का अवलोकन करने पर एक बात पता चली कि इसे पेन से लिखा गया था और प्रत्येक पन्ने को खूबसूरती से सजाया गया था विद्यालय के सचिव राना मुखर्जी कहते हैं कि प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा वह मास्टर कैलिग्राफर थे जिन्होंने भारतीय संविधान को सजा धजा कर प्रस्तुत किया । वे मशहूर कैलीग्राफर थे। मूल संविधान के प्रत्येक पन्ने कैलीग्राफी से सजे हुए हैं। उन्होंने इसके लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया मगर वे चाहते थे कि आखिरी पन्ने पर उनका और उनके दादा जी प्रेम प्रसाद रायजदा का नाम लिखा हो।
प्रदर्शनी का अवलोकन करने पालकों के अलवा दूर -दराज से लोग आए थे आम राय यह बनी कि यह केवल एक कानूनी दस्तावेज़ नहीं, बल्कि एक कला का नमूना भी है, जिसकी कारीगरी और ऐतिहासिक महत्व के लिए दुनिया भर में प्रशंसा की जाती है।
इस मौके पर बड़ी संख्या में पालक अभिभावक राजनेता जमा हुए थे। एसडीएम कहती हैं कि दर्शाए गए जानकारियां ज्ञानवर्धक और सूचना परक है।
प्रर्दशनी में उन 15 महिलाओं को भी दर्शाया गया था जिन्होंने संविधान लेखन में अपना योगदान दिया था।
सचिव राना मुखर्जी कहते हैं कि भारतीय गणतंत्र में 24 जनवरी का बड़ा महत्व है। 24 जनवरी 1950 को, संविधान सभा के सदस्यों ने भारतीय संविधान की अंतिम हाथ से लिखी प्रतियों पर हस्ताक्षर किए। यह संविधान सभा की आखिरी बैठक थी। इसे चित्र-प्रर्दशनी में दर्शाया गया ।
इसके अलावा देखने से यह जानकारी मिल सकी कि 24 जनवरी 1950 के दिन की अन्य महत्वपूर्ण घटनाएँ भी हुई । मसलन- डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भारत का पहला राष्ट्रपति चुना गया।
24 जनवरी इसलिए भी खास है :-
जन गण मन को आधिकारिक तौर पर भारत का राष्ट्रगान अपनाया गया।
वंदे मातरम को भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता दी गई। इत्यादि
प्रमुख राष्ट्रीय प्रतीकों को आधिकारिक तौर पर अपनाया गया
यह एक ऐतिहासिक दिन है जो संविधान के निर्माण को भारत गणराज्य के जन्म से जोड़ता है।
यह प्रर्दशनी ऐसे समय लगाई गई देश भर में 77 वां गणतंत्र दिवस मनाया गया ।
एक दर्शक कहते हैं -गणतंत्र दिवस के अवसर पर विद्यालयों में नृत्य-संगीत और मिष्ठान वितरण का ही आयोजन होता रहा है मगर शिप्रा विद्यायल का यह आयोजन ज्ञानवर्धक और सूचना परक लगी। शिप्रा विद्यालय के छात्रों और स्टाफ ने निःसंदेह बड़ा काम कर दिखाया । बात तो सौ फीसदी सही है —–