अर्धसैनिक बलों की वापसी, अब राज्य पुलिस संभालेगी मोर्चा

 

स्थानीय युवाओं को रोजगार और आदिवासियों को मिलेगा सीधा लाभ

 

जगदलपुर | चार दशक तक नक्सलवाद की हिंसा झेलने वाला बस्तर अब एक निर्णायक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। सुरक्षा अभियानों की सफलता, बड़े नक्सली नेताओं के लगातार आत्मसमर्पण और सरकार की सख्त नीति के चलते अब यह क्षेत्र नक्सलवाद के अंत की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। इसी बदलते परिदृश्य के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लेते हुए स्पष्ट किया है कि नक्सल विरोधी अभियान के लिए स्थापित पुलिस और अर्धसैनिक बलों के कैंप बंद नहीं किए जाएंगे, बल्कि इन्हें विकास और प्रशासनिक केंद्रों में तब्दील किया जाएगा। यह कदम बस्तर को वास्तविक अर्थों में सुरक्षित और भयमुक्त बनाने की दिशा में अहम साबित होगा। इस फैसले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। वरिष्ठ आदिवासी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि सुरक्षा कैंपों को जनहित में उपयोग करना एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने सरकार से यह भी आग्रह किया कि इन विकास केंद्रों में स्थानीय आदिवासियों और युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया जाए और जल, जंगल, जमीन से जुड़े उनके अधिकारों को सुरक्षित रखा जाए।नक्सल मुक्त बस्तर को लेकर प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा ने जगदलपुर में प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि कैंप बंद नहीं होंगे बल्कि उनका स्वरूप पूरी तरह बदला जाएगा। उन्होंने साफ किया कि अब तक जिन कैंपों का उपयोग सुरक्षा और ऑपरेशन के लिए किया जा रहा था, वहीं आगे चलकर अस्पताल, स्कूल, प्रोसेसिंग यूनिट और प्रशासनिक इकाइयों के रूप में विकसित किए जाएंगे। इस फैसले के साथ ही बस्तर में विकास की एक नई संरचना खड़ी करने की तैयारी शुरू हो गई है। सरकार की योजना के अनुसार, खाली होने वालें कैंपों में अस्पताल, स्कूल और प्रोसेसिंग यूनिट खोले जाएंगे, ताकि दूरस्थ ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों को बुनियादी सुविधाएं स्थानीय स्तर पर मिल सकें। अभी तक इलाज और शिक्षा के लिए शहरों पर निर्भर रहने वाले लोगों को अब अपने ही क्षेत्र में बेहतर सेवाएं उपलब्ध होंगी। विशेष रूप से लघु वनोपज आधारित प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित किए जाने से तेंदूपत्ता, महुआ, साल बीज जैसे उत्पादों का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण होगा, जिससे उनकी कीमत बढ़ेगी और आदिवासियों की आय में सीधा इजाफा होगा। इसी क्रम में सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अर्धसैनिक बलों की वापसी के बाद कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी पूरी तरह छत्तीसगढ़ पुलिस संभालेगी। 31 मार्च 2026 के बाद बस्तर की सुरक्षा व्यवस्था राज्य पुलिस के हवाले कर दी जाएगी। गांव-गांव में गश्त करने से लेकर शांति व्यवस्था बनाए रखने तक का काम अब स्थानीय पुलिस बल करेगा, जिससे प्रशासनिक पकड़ और मजबूत होगी तथा आम नागरिकों में विश्वास बढ़ेगा। कैंपों के इस बदलाव से केवल बुनियादी सुविधाएं ही नहीं बढ़ेंगी, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार की नई उम्मीद भी मिलेगी। अस्पताल, स्कूल, प्रोसेसिंग यूनिट और प्रशासनिक केंद्रों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे, जिससे युवाओं को अपने ही क्षेत्र में काम करने का मौका मिलेगा और पलायन में कमी आएगी। यह पहल बस्तर की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सरकार का ध्यान केवल विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षा के अंतिम खतरे को खत्म करने पर भी है। इसी के तहत आईईडी फ्री विलेज अभियान शुरू किया जाएगा। गृहमंत्री ने बताया कि हर ग्राम पंचायत को चिन्हित कर व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया जाएगा, जिसमें सुरक्षा बल जंगलों, पगडंडियों और ग्रामीण क्षेत्रों में दबे बारूदी सुरंगों को खोजकर नष्ट करेंगे। पूरी तरह सुरक्षित होने के बाद ही किसी गांव को आधिकारिक रूप से आईईडी मुक्त घोषित किया जाएगा ।छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि नक्सलवाद के कमजोर पड़ने के बाद बस्तर में सुरक्षा व्यवस्था का ढांचा पूरी तरह बदला जाएगा। उन्होंने कहा कि अर्धसैनिक बलों की चरणबद्ध वापसी के साथ ही क्षेत्र की जिम्मेदारी पूरी तरह राज्य पुलिस के हाथों में आ जाएगी। DGP के अनुसार, अब तक नक्सल विरोधी अभियानों के लिए स्थापित किए गए सुरक्षा कैंप भविष्य में बहुउद्देशीय केंद्र के रूप में विकसित किए जाएंगे। इन कैंपों का उपयोग छत्तीसगढ़ पुलिस अपने अनुसार थानों, प्रशासनिक इकाइयों और जनसेवा से जुड़े ढांचे के रूप में करेगी, जिससे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ स्थानीय लोगों को सुविधाएं भी मिलेंगी। कुल मिलाकर, बस्तर अब उस दौर में प्रवेश कर रहा है जहां नेताओं द्वारा लिए गए फैसलों का सीधा असर जमीन पर दिखाई देने लगा है और आदिवासियों के अधिकारों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जहां कभी गोलियों और बारूद की गूंज थी, वहां अब विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य की नई उम्मीदें आकार लेने लगेगी।

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