जगदलपुर, 28 जनवरी. बस्तर की आदिम संस्कृति, पारंपरिक खानपान और अनूठी जीवनशैली को सहेजने के उद्देश्य से आयोजित हो रहे ‘बस्तर पंडुम 2026’ के जिला स्तरीय महोत्सव का बुधवार को जगदलपुर के सिटी ग्राउंड में आयोजन किया गया । मांदर की थाप और लोकगीतों की गूंज के बीच आयोजित इस गरिमामय समारोह की शुरुआत सांसद श्री महेश कश्यप, जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव, चित्रकोट विधायक श्री विनायक गोयल और महापौर श्री संजय पांडे सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर की।

शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए सांसद श्री महेश कश्यप ने उपस्थित जनसमूह के सामने संस्कृति के संरक्षण का एक गंभीर और विचारणीय पहलू रखा। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि आज हम जिस समृद्ध विरासत पर गर्व करते हैं, उस संस्कृति को बनाने में लाखों पीढ़ियां खप गईं और इसे बाहरी आक्रमणों से बचाने के लिए करोड़ों पीढ़ियों ने अपना बलिदान दिया है। उन्होंने सचेत करते हुए कहा कि जिस राष्ट्र को समाप्त करना होता है, शत्रु सबसे पहले उसकी संस्कृति को ही नष्ट करते हैं। सांसद ने चिंता व्यक्त की कि हमारी आने वाली पीढ़ियां अब अपनी मूल संस्कृति, खानपान और रहन-सहन को भुलाने लगी हैं, ऐसे में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इसे संरक्षित करने का जो बीड़ा उठाया है, वह अत्यंत सराहनीय है। यह आयोजन एक ऐसा सशक्त मंच है, जहाँ हम गर्व के साथ अपनी संस्कृति का प्रदर्शन कर सकते हैं।
वहीं, कार्यक्रम में अपने विचार रखते हुए जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव ने बस्तर के नैसर्गिक सौंदर्य और यहाँ के निवासियों की सादगी का सजीव चित्रण किया। उन्होंने कहा कि हमारा बस्तर अद्भुत प्राकृतिक सुषमा से परिपूर्ण है, जहाँ की गुफाएं, झरने और नदियां बरबस ही मन मोह लेती हैं, लेकिन उससे भी अधिक सुंदर यहाँ के सीधे-सादे और सरल लोग हैं। उन्होंने बस्तर की वन-संपदा के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि यहाँ की वनस्पति का प्रत्येक भाग औषधियों के रूप में उपयोगी है और बस्तर पंडुम के माध्यम से हमारी वेशभूषा, खानपान और संस्कृति की गूंज अब पूरे देश में सुनाई देगी।
इसी कड़ी में चित्रकोट विधायक श्री विनायक गोयल ने आधुनिकता की दौड़ में पीछे छूटती स्वस्थ परंपराओं की ओर सबका ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने अपने पारिवारिक परिवेश को याद करते हुए कहा कि हमने उस परिवार में जन्म लिया है, जहाँ ‘मंडिया पेज’ (रागी का पेय) पीकर जीवन बिताया जाता था और हम प्रकृति व बहुदेव पूजक हैं। श्री गोयल ने कहा कि समय के साथ हमने अपने रहन-सहन में जो बदलाव किए हैं, उसी ने आज हमारे समाज में बीमारियों को न्योता दिया है। उन्होंने इस आयोजन को अपनी जड़ों की ओर लौटने और पुरानी स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने का एक महत्वपूर्ण अवसर बताया। महापौर श्री संजय पांडे ने कहा कि बस्तर का उत्सव मतलब बस्तर पंडुम । हमारे पुरखों की गौरवशाली परम्परा है पण्डुम। इस गौरवशाली परम्परा को अक्षुण्ण रखने की जिम्मेदारी हम सभी की है।