बीजापुर – छत्तीसगढ़ शासन की पूना मारगेम पुनर्वास से पुनर्जीवन नीति के तहत बीजापुर जिले में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिली है। साउथ सब-जोनल ब्यूरो, एओबी डिवीजन और भामरागढ़ एरिया कमेटी से जुड़े 52 माओवादी कैडरों ने हिंसा और हथियारों का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। इन सभी पर उनके पद और भूमिका के अनुसार कुल 1.41 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था, जिनमें 21 महिला और 31 पुरुष कैडर शामिल हैं।
यह सफलता राज्य सरकार की पुनर्वास नीति और नियद नेल्ला नार योजना के प्रभावी क्रियान्वयन तथा सुरक्षा बलों के समन्वित प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है। बीजापुर जिले में 1 जनवरी 2024 से अब तक 876 माओवादी मुख्यधारा में लौट चुके हैं, 1126 माओवादी गिरफ्तार किए गए हैं और 223 माओवादी मुठभेड़ों में मारे गए हैं।
मुख्यधारा में लौटने वालों में एक डीवीसीएम, तीन पीपीसीएम, दस एसीएम, आठ डिवीजन व ब्यूरो पार्टी सदस्य, नौ प्लाटून व एरिया कमेटी सदस्य, तीन मिलिशिया प्लाटून कमांडर, एक डिप्टी कमांडर, तीन मिलिशिया सदस्य, एक पीएलजीए सदस्य तथा अलग-अलग आरपीसी के 11 जनताना सरकार/सीएनएम/डीएकेएमएस अध्यक्ष शामिल हैं।
इन सभी कैडरों ने भारतीय संविधान में आस्था व्यक्त करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था में सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन जीने का संकल्प लिया है। पुनर्वास प्रक्रिया के तहत प्रत्येक कैडर को तत्काल 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है और उनके पुनर्समावेशन की विधिक प्रक्रिया जारी है।
इस आत्मसमर्पण प्रक्रिया में डीआरजी, बस्तर फाइटर, एसटीएफ, कोबरा और केरिपु बल की विभिन्न बटालियनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अभियान का मार्गदर्शन बस्तर रेंज आईजी और केरिपु सेक्टर के वरिष्ठ अधिकारियों ने किया, जबकि जिला स्तर पर पुलिस अधीक्षक बीजापुर डॉ. जितेंद्र कुमार यादव के नेतृत्व में संयुक्त कार्रवाई की गई।
बीजापुर एसपी डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने माओवादियों से अपील करते हुए कहा कि वे भ्रामक और हिंसक विचारधाराओं को त्यागकर निर्भय होकर समाज की मुख्यधारा में लौटें, क्योंकि पूना मारगेम नीति उनके भविष्य को सुरक्षित, सम्मानजनक और स्वावलंबी बनाने के लिए हर संभव सुविधा उपलब्ध करा रही है।