कुत्तों को भोजन देने वाले भी जवाबदेह और जिम्मेदार होगें – सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट  (टिप्पणी)अगर आप अपने घर के आसपास आवारा कुत्तों भोजन देकर पुण्य कमाने में यकीन कर रहें है। तो ये खबर आपके लिए अति महत्वपूर्ण है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट 7 नवंबर, 2025 के अपने उस आदेश में संशोधन की मांग करने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें अधिकारियों को संस्थागत क्षेत्रों और सड़कों से इन आवारा जानवरों को हटाने का निर्देश दिए गया थे। लगातार कुत्तों के काटने और कुत्तों को लेकर बढ़ती सड़क दुर्घटना से सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रूख अपनाया है और आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि कुत्ते के काटने की घटनाओं के लिए जानवर प्रेमियों और उन्हें खाना खिलाने वालों को भी जिम्मेदार या जवाबदेह ठहराया जाएगा। यानि ऐसे कुत्ते किसी को काट लें तो आप मुश्किल में पड़ सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (13 जनवरी) को आवारा कुत्तों के मामले पर अहम सुनवाई करते हुए यह कड़ी टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट में रिहायशी इलाकों में आवारा कुत्तों के आतंक पर संकेत दिया ऐसे में दुर्घटना अगर होती है या किसी को चोट लगती है तो नागरिक अधिकारियों और कुत्ते पालने वालों दोनों को उत्तरदायी ठहरा सकता है।
यह मौखिक टिप्पणी तब आई जब न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ आवारा कुत्तों के मुद्दे से संबंधित स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी। पीठ ने कहा कि कुत्ते के काटने की घटनाओं के लिए कुत्ते प्रेमियों और उन्हें खाना खिलाने वालों को भी जिम्मेदार और जवाबदेह ठहराया जाएगा।

न्यायमूर्ति नाथ ने कहा, कुत्तों के काटने से बच्चों या बुजुर्गों की मृत्यु या चोट के हर मामले के लिए हम राज्य सरकारों से भारी मुआवजा वसूलने की मांग करेंगे, क्योंकि उन्होंने पिछले पांच वर्षों में नियमों के कार्यान्वयन के संबंध में कुछ नहीं किया है। साथ ही इन आवारा कुत्तों को खाना खिलाने वालों पर भी जिम्मेदारी और जवाबदेही तय की जाएगी। अगर आपको इन जानवरों से इतना प्यार है, तो आप उन्हें अपने घर क्यों नहीं ले जाते? ये कुत्ते इधर-उधर क्यों घूमते हैं, लोगों को काटते हैं और डराते हैं?

न्यायमूर्ति मेहता ने न्यायमूर्ति नाथ के विचारों से सहमति जताते हुए कहा, जब कुत्ते 9 साल के बच्चे पर हमला करते हैं तो किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए? क्या उस संगठन को जो उन्हें खाना खिला रहा है? आप चाहते हैं कि हम इस समस्या से आंखें मूंद लें।

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