सुकमा/ सुकमा ज़िले के कोंडासावली ग्राम पंचायत के कर्रेपारा गांव में एम्बुलेंस न मिलने के कारण एक गंभीर रूप से बीमार मरीज़ को पालकी में बिठाकर अस्पताल ले जाया गया।
ग्रामीणों से प्राप्त सूचना के मुताबिक कर्रेपारा के रहने वाले कुंजाम हुर्रा ने कथित तौर पर किसी अज्ञात कारण से ज़हर खा लिया था। उनकी हालत जल्द ही बिगड़ गई और उन्हें लगातार उल्टी होने लगी। उसकी गंभीर हालत देखकर परिवार वालों ने मेडिकल सहायता के लिए इंतज़ाम करने की कोशिश की, लेकिन गांव के प्राइमरी हेल्थ सेंटर में कोई एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं थी।
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कोई और चारा न होने पर, गांव वाले और परिवार वाले उन्हें कांवड़ में बिठाकर अस्पताल ले गए। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। गांव के मुखिया, रायघर ने पुष्टि की कि मरीज़ को पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने शुरुआती इलाज किया। हालांकि, उनकी हालत की गंभीरता को देखते हुए, उन्हें आगे के इलाज के लिए सुकमा ज़िला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
सरकार 2047 का विजन लिए चल रही है। ऐसे में सुकमा से एक डरावनी तस्वीर निकल कर आ रही है जिसमें एक गंभीर मरीज को अस्पताल पहुँचाने के लिए कांवड़ का सहारा लिया गया । ग्रामीण कहते हैं हमारे लिए मरीज को इस तरह पहुँचाना आम बात है। यहाँ गाड़ी (एंबुलेंस) नहीं मिलती ।
यह घटना दूरदराज के इलाकों में बेसिक हेल्थकेयर सुविधाओं की उपलब्धता पर गंभीर सवाल उठाती है। जबकि सरकार और प्रशासन बस्तर में विकास लाने और नक्सलवाद को खत्म करने का दावा करते हैं, अंदरूनी गांवों में सड़क कनेक्टिविटी और इमरजेंसी मेडिकल सेवाओं की लगातार कमी ज़मीनी हकीकत को उजागर करती है। ग्रामीण कहते हैं कि यह कोई नई बात नहीं हैं हम अक्सर अपने रिश्तेदारों को कांवड़ से ही अस्पताल पहुँचाते हैं।
एक बार फिर, यह मामला दिखाता है कि दूरदराज के इलाकों में हेल्थकेयर और इमरजेंसी ट्रांसपोर्ट तक पहुंच एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।