साहित्य की जीवन धारा होती है वाचिक परम्परा – रुद्र नारायण पाणिग्रही

जगदलपुर/ राज्य साहित्य उत्सव का भव्य आयोजन राजधानी रायपुर में ” आदि से अनादि ‘ के प्रेरक वाक्य के साथ गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस साहित्य महोत्सव में मातृभूमि के प्रति समर्पण की गूंज राष्ट्र की वाणी के रूप में सुनाई दी। आयोजन में बस्तर की लोक लय और उत्साहपूर्ण अभिव्यक्ति ने विशेष पहचान बनाई।
परिचर्चा सत्र में प्रसिद्ध साहित्यकार रुद्र नारायण पाणिग्रही ने “वाचिक परम्परा में साहित्य ” जैसे महत्वपूर्ण विषय पर सत्र संचालन करते हुए बस्तर अंचल की समृद्ध ग्राम्य वाचिक परम्परा के विविध उपादानों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने लोकगीतों, लोककथाओं तथा लोकाख्यानों की संरचना,संवेदना और सामाजिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ये परंपराएं पीढ़ी दर पीढ़ी जनमानस को दिशा देती आ रही हैं। सहभागी साहित्यकारों शिवकुमार पांडेय, डॉ जयमती , सुधीर पाठक, डॉ महेंद्र मिश्र ने आज के दौर में वाचिक परम्परा को संजोए रखना आवश्यक बताया जिससे सांस्कृतिक पहचान जीवंत बनी रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *