जैतालुर मंडई: देवताओं के मेल-मिलाप और विदाई के साथ कोदई माता मेला संपन्न

घी, दूध और मूड़ी माली तालाब के जल से माता का स्नान-श्रृंगार,

पंचांग परिवर्तन से वर्ष 2025 में दूसरी बार लगा मेला

बीजापुर। इलाके के प्रसिद्ध कोदई माता जैतालुर मेला परंपरागत रस्मों और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मंगलवार देर शाम संपन्न हो गया। मेले का समापन देवताओं के मेल-मिलाप, श्रद्धालुओं द्वारा बलि एवं बाहर से आए देवी-देवताओं की विधिवत विदाई के साथ हुआ।
सोमवार को माता के श्रृंगार एवं पूजन के बाद मेले की औपचारिक शुरुआत हुई थी। जगार रस्म के अंतर्गत कोदई माता को दूध, घी एवं मूड़ी माली तालाब के जल से स्नान कराया गया। पीड़ा पटानी रस्म के माध्यम से ग्राम की बुराइयों और अपशगुन को ग्राम सीमा से बाहर करने की परंपरा निभाई गई।
कोदई माता जैतालुर मेला क्षेत्र में मेला-मड़ई के दौर की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। ग्राम पंचायत द्वारा मेला स्थल पर सुरक्षा, प्रकाश, पेयजल एवं बाजार व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले लगाए गए, जबकि बर्तन, कपड़े, आभूषण और लोहे के औजारों की दुकानें अलग-अलग पंक्तियों में सजी रहीं।
इस वर्ष हिन्दी पंचांग के अनुसार मेला 30 दिसंबर 2025 को पड़ने के कारण वर्ष 2025 में दूसरी बार आयोजित हुआ। इससे क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक उत्साह विशेष रूप से देखने को मिला। जिला प्रशासन द्वारा स्थानीय अवकाश घोषित किए जाने से आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु जैतालुर पहुंचे।
माता पुजारी एवं ग्राम प्रमुखों ने बताया कि कोदई माता मेले के साथ ही महाराष्ट्र के गढ़चिरोली जिले के पल्लीगांव में भी उसी दिन मेला लगता है। पल्लीगांव की पल्लिकारीन माता और कोदई माता को बहनें माना जाता है, जिसके चलते वहां से भी बड़ी संख्या में आदिवासी श्रद्धालु जैतालुर पहुंचे और मेले में सहभागिता निभाई।

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