जगदलपुर | बस्तर जिले विशेषकर जगदलपुर शहर में इन दिनों गुटखा, सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पादों की कीमतों को लेकर भारी अव्यवस्था और कथित लूट की स्थिति बनी हुई है। लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि थोक (Wholesale) व्यापार करने वाले कुछ कारोबारी जमाखोरी और मुनाफाखोरी कर रहे हैं तथा खुदरा (Retail) विक्रेताओं को ही पैकेट पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से अधिक दर पर माल उपलब्ध करा रहे हैं।
इसका सीधा प्रभाव आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। खुदरा व्यापारी भी मजबूरी में उपभोक्ताओं को एमआरपी से अधिक कीमत पर सामान बेचने को विवश हो रहे हैं, क्योंकि उन्हें स्वयं बढ़ी हुई दर पर माल दिया जा रहा है। इस प्रकार पूरे सिस्टम में कृत्रिम मूल्य वृद्धि कर आम जनता की जेब पर सीधा बोझ डाला जा रहा है।
यह स्थिति अत्यंत गंभीर है क्योंकि यह केवल बाजार की सामान्य प्रक्रिया नहीं बल्कि सुनियोजित तरीके से मुनाफाखोरी का मामला प्रतीत होता है। यदि किसी उत्पाद पर एमआरपी अंकित है तो उससे अधिक कीमत वसूलना नियमों के विरुद्ध है, फिर भी खुलेआम यह सब चल रहा है।*
सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि गुटखा, सिगरेट एवं तंबाकू उत्पादों में यह कथित लूट लंबे समय से जारी है और थोक व्यापार करने वाले कुछ लोग खुलेआम जनता को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाकर अपनी तिजोरी भर रहे हैं। इससे यह संदेह भी उत्पन्न होता है कि कहीं न कहीं बाजार व्यवस्था को प्रभावित करने के लिए जानबूझकर कृत्रिम कमी (Artificial Shortage) बनाई जा रही है।
इस पूरे मामले में कई गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं:
क्या संबंधित विभागों को इस स्थिति की जानकारी नहीं है?
क्या औषधि एवं तंबाकू नियंत्रण से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों को यह सब दिखाई नहीं दे रहा?
क्या जिला प्रशासन को बाजार में चल रही इस अव्यवस्था का पता नहीं है?
या फिर किसी प्रकार की सांठगांठ के कारण कार्रवाई नहीं हो रही?
जनता के बीच यह चर्चा भी आम है कि यदि प्रशासन को जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही, तो यह स्थिति व्यवस्था पर अविश्वास पैदा करती है। प्रशासन का दायित्व है कि वह आम नागरिकों को शोषण से बचाए और बाजार में पारदर्शिता सुनिश्चित करे।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) स्पष्ट रूप से यह कहना चाहती है कि हम खुदरा व्यापारियों को दोषी नहीं मानते, क्योंकि वे भी इस कथित थोक मुनाफाखोरी के शिकार हैं। वास्तविक जांच का दायरा थोक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) तक जाना चाहिए, जहां से मूल्य वृद्धि की शुरुआत हो रही है।
संगठन की मांगें निम्नलिखित हैं:
पूरे जिले में गुटखा, सिगरेट एवं तंबाकू उत्पादों के थोक व्यापारियों की विशेष जांच कराई जाए।
जमाखोरी एवं कृत्रिम मूल्य वृद्धि करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
एमआरपी से अधिक कीमत पर बिक्री रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
खुदरा व्यापारियों को उचित दर पर माल उपलब्ध कराने हेतु निगरानी तंत्र विकसित किया जाए।
उपभोक्ताओं के लिए शिकायत दर्ज करने की प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए।
यदि शीघ्र ही इस विषय में ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) जनता, व्यापारी वर्ग एवं सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर लोकतांत्रिक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। जनता का आर्थिक शोषण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
हम जिला प्रशासन से अपेक्षा करते हैं कि वह निष्पक्ष जांच कर सच्चाई जनता के सामने लाए और दोषियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि बाजार व्यवस्था में विश्वास बहाल हो सके।
इसका सीधा प्रभाव आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। खुदरा व्यापारी भी मजबूरी में उपभोक्ताओं को एमआरपी से अधिक कीमत पर सामान बेचने को विवश हो रहे हैं, क्योंकि उन्हें स्वयं बढ़ी हुई दर पर माल दिया जा रहा है। इस प्रकार पूरे सिस्टम में कृत्रिम मूल्य वृद्धि कर आम जनता की जेब पर सीधा बोझ डाला जा रहा है।
यह स्थिति अत्यंत गंभीर है क्योंकि यह केवल बाजार की सामान्य प्रक्रिया नहीं बल्कि सुनियोजित तरीके से मुनाफाखोरी का मामला प्रतीत होता है। यदि किसी उत्पाद पर एमआरपी अंकित है तो उससे अधिक कीमत वसूलना नियमों के विरुद्ध है, फिर भी खुलेआम यह सब चल रहा है।*
सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि गुटखा, सिगरेट एवं तंबाकू उत्पादों में यह कथित लूट लंबे समय से जारी है और थोक व्यापार करने वाले कुछ लोग खुलेआम जनता को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाकर अपनी तिजोरी भर रहे हैं। इससे यह संदेह भी उत्पन्न होता है कि कहीं न कहीं बाजार व्यवस्था को प्रभावित करने के लिए जानबूझकर कृत्रिम कमी (Artificial Shortage) बनाई जा रही है।
इस पूरे मामले में कई गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं:
क्या संबंधित विभागों को इस स्थिति की जानकारी नहीं है?
क्या औषधि एवं तंबाकू नियंत्रण से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों को यह सब दिखाई नहीं दे रहा?
क्या जिला प्रशासन को बाजार में चल रही इस अव्यवस्था का पता नहीं है?
या फिर किसी प्रकार की सांठगांठ के कारण कार्रवाई नहीं हो रही?
जनता के बीच यह चर्चा भी आम है कि यदि प्रशासन को जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही, तो यह स्थिति व्यवस्था पर अविश्वास पैदा करती है। प्रशासन का दायित्व है कि वह आम नागरिकों को शोषण से बचाए और बाजार में पारदर्शिता सुनिश्चित करे।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) स्पष्ट रूप से यह कहना चाहती है कि हम खुदरा व्यापारियों को दोषी नहीं मानते, क्योंकि वे भी इस कथित थोक मुनाफाखोरी के शिकार हैं। वास्तविक जांच का दायरा थोक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) तक जाना चाहिए, जहां से मूल्य वृद्धि की शुरुआत हो रही है।
संगठन की मांगें निम्नलिखित हैं:
पूरे जिले में गुटखा, सिगरेट एवं तंबाकू उत्पादों के थोक व्यापारियों की विशेष जांच कराई जाए।
जमाखोरी एवं कृत्रिम मूल्य वृद्धि करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
एमआरपी से अधिक कीमत पर बिक्री रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
खुदरा व्यापारियों को उचित दर पर माल उपलब्ध कराने हेतु निगरानी तंत्र विकसित किया जाए।
उपभोक्ताओं के लिए शिकायत दर्ज करने की प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए।
यदि शीघ्र ही इस विषय में ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) जनता, व्यापारी वर्ग एवं सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर लोकतांत्रिक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। जनता का आर्थिक शोषण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
हम जिला प्रशासन से अपेक्षा करते हैं कि वह निष्पक्ष जांच कर सच्चाई जनता के सामने लाए और दोषियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि बाजार व्यवस्था में विश्वास बहाल हो सके।