सुकमा:समाजसेवी एवं नक्सल विरोधी अभियान से जुड़े डॉ. फारूख अली ने माओवादी कमांडर माड़वी हिड़मा पर बने गीतों और उनके समर्थन में आयोजित नृत्य-कार्यक्रमों पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर हिड़मा पर बने गीतों पर नाच-गाना किया जा रहा है, जो शहीद जवानों और प्रभावित परिवारों की भावनाओं के विरुद्ध है।
डॉ. अली ने आरोप लगाया कि कुछ लोग हिड़मा को आदिवासियों का “मसीहा” बताने या महान स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा के समकक्ष प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहे हैं, जो इतिहास और संवैधानिक मूल्यों के विपरीत है। उनके अनुसार, हिड़मा कई बड़ी नक्सली घटनाओं का मास्टरमाइंड रहा, जिनमें सुरक्षा बलों को भारी क्षति उठानी पड़ी।
प्रमुख हमलों का उल्लेख
• 2010 ताड़मेटला हमला (अविभाजित दंतेवाड़ा) – 76 CRPF जवान शहीद
• 2013 झीरम घाटी हमला – कई राजनीतिक नेताओं की हत्या
• 2017 बुर्कापाल (सुकमा) हमला – 25 CRPF जवान शहीद
• 2021 सुकमा–बीजापुर सीमा हमला – 22 जवान शहीद
डॉ. अली ने कहा कि ऐसे व्यक्ति के समर्थन में सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित करना निंदनीय है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि जहां भी नक्सल समर्थन में नाच-गाना या अन्य गतिविधियां हों, वहां कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि हिड़मा का शव जब पुवर्ती लाया गया था, उस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोढ़ी द्वारा काली वर्दी डाले जाने की घटना असंवैधानिक थी। डॉ. अली ने राज्य सरकार से इस मामले में भी जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की है।