नक्सली कमांडर पापा राव के सरेंडर करने के बाद अब नहीं बचा कोई लीडर

जगदलपुर। तेजी से नक्सलमुक्त बस्तर से एज एक बड़ी खबर है कि दोरला जनजाति के डीकेएसजेडसी रैंक माओवादी पापाराव 12 साथियों के साथ पुनर्वास के लिए जगदलपुर पहुंच रहा है। पापाराव के पास एके-47, एसएलआर सहित भारी मात्रा में हथियार मौजूद हैं। पापा राव के आत्मसमर्पण को शासन के पूना मार्गेम योजना की बड़ी उपलब्धि और माओवाद की ताबूत में आखिरी कील माना जा रहा है।
पुष्ट खबरों के मुताबिक नक्सल संगठन डीकेएसजेडसीका टॉप लीडर है। पापाराव के साथ दर्जनभर नक्सली आत्मसमर्पण करने जगदलपुर आ रहे हैं। इस टीम में कई महिला नक्सली भी शामिल हैं। खबरों के मुताबिक पापाराव और अन्य नक्सली बीजापुर से रवाना होकर जगदलपुर पहुंचेंगे और संभवतः बुधवार को यहां छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा तथा वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के समक्ष सरेंडर करेंगे। इस दौरान वे अपने सारे असलहे भी पुलिस को सौंप देंगे।यह आत्मसमर्पण बस्तर के मायने में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गृहमंत्री विजय शर्मा का दावा है कि पापाराव के आत्मसमर्पण के बाद बस्तर और छत्तीसगढ़ में अब इस रैंक का कोई नक्सली नेता नहीं रह जाएगा। जो हैं वे तेलंगाना जा चुके हैं। यहां अब पापाराव जैसा कमांडर लेवल का कोई नक्सली नहीं है। बस्तर में अब सिर्फ एरिया कमेटी और पार्टी सदस्य लेवल के ही चंद नक्सली रह गए हैं तथा वे भी हथियारविहीन हैं। ये नक्सली भी स्वतः समाज की मुख्यधारा से जुड़ कर जीवन यापन कर रहे हैं। तेजी से नक्सलमुक्त हो रहे बस्तर के लिए यह बड़ी उपलब्धि है। नक्सलमुक्त होने के साथ ही बस्तर के विकास के द्वार खुल चुके हैं। बस्तर संभाग के सुदूर, बीहड़ और अति नक्सल प्रभावित गांवों में बिजली, पानी, सड़क, चिकित्सा, शिक्षा, मोबाईल फोन कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं पहुंच रही हैं। विकास और जन सुविधाओं के कार्यों पर जिन माओवादियों ने ग्रहण लगा रखा था, अब उन्हीं पर अस्तित्व का ग्रहण लग चुका है।

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