कोरापुट से जगदलपुर तक वैकल्पिक बस सेवा शुरू करने की मांग, होटल एसोसिएशन अध्यक्ष जतिन जायसवाल बोले—प्रशासन जल्द निकाले समाधान
जगदलपुर। बस्तर के ऐतिहासिक दशहरा पर्व में शामिल होने की तैयारी कर रहे पर्यटकों की राह में ओड़िशा में हुआ लैंडस्लाइड बाधा बन गया है। रेलमार्ग प्रभावित होने से यात्री ट्रेनों की आवाजाही पर असर पड़ा है, जिसके चलते जगदलपुर आने वाले सैलानियों की परेशानी बढ़ गई है। इसका असर अब होटल कारोबार पर भी दिखाई देने की आशंका है। होटल कारोबारियों के अनुसार, परिवहन की समस्या के कारण कुछ पर्यटक अपनी पहले से कराई गई बुकिंग रद्द करा रहे हैं। ऐसे में बस्तर के पर्यटन उद्योग पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
75 दिनों तक चलने वाले ऐतिहासिक पर्व पर असर की आशंका
बस्तर दशहरा अपनी अनूठी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। लगभग 75 दिनों तक चलने वाले इस ऐतिहासिक आयोजन में शामिल होने के लिए हर साल पर्यटक जगदलपुर पहुंचते हैं। लेकिन इस बार ओड़िशा में लैंडस्लाइड के कारण रेल यातायात प्रभावित होने से पर्यटकों की यात्रा योजनाएं बिगड़ रही हैं।
जिन सैलानियों ने पहले से होटल बुकिंग कराई थी, उनके बुकिंग रद्द कराने की खबरों ने होटल कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। यदि पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका असर होटल, परिवहन, खानपान और पर्यटन से जुड़े अन्य व्यवसायों पर भी पड़ सकता है।
कोरापुट से जगदलपुर तक बस चलाने की मांग
इस स्थिति को देखते हुए होटल एसोसिएशन ने प्रशासन से वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था करने की मांग की है। एसोसिएशन अध्यक्ष जतिन जायसवाल का कहना है कि ओड़िशा के कोरापुट से जगदलपुर तक बस सेवा शुरू करने की दिशा में जल्द पहल की जानी चाहिए, ताकि रेल सेवा बाधित होने के बावजूद पर्यटक सड़क मार्ग से बस्तर पहुंच सकें।
होटल कारोबारियों का मानना है कि यदि पर्यटकों को आने-जाने का सुविधाजनक विकल्प मिल जाता है, तो वे अपनी यात्रा रद्द करने के बजाय बस्तर दशहरा में शामिल हो सकेंगे। इससे पर्यटन कारोबार को संभावित नुकसान से बचाने में मदद मिल सकती है।
‘दशहरा केवल पर्व नहीं, बस्तर की पहचान है’
जतिन जायसवाल के अनुसार, बस्तर दशहरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान है। ऐसे महत्वपूर्ण अवसर पर परिवहन बाधित होने से पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित होना चिंता का विषय है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जल्द वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की जाए।
प्रशासन की पहल का इंतजार
अब होटल कारोबारियों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। जरूरत है कि संबंधित विभाग परिवहन संचालकों और ओड़िशा प्रशासन के साथ समन्वय कर सड़क मार्ग से यात्रा के विकल्प तलाशें। बस सेवा शुरू करने की स्थिति में आवश्यक परमिट और दूसरे राज्यों में लागू परिवहन नियमों का पालन भी सुनिश्चित करना होगा।
समय रहते वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था नहीं हुई, तो बस्तर दशहरा के दौरान पर्यटकों की आवाजाही और स्थानीय पर्यटन कारोबार प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती है कि रेलमार्ग की बाधा के बीच सैलानियों को राहत देने के लिए जल्द ठोस कदम उठाए जाएं।