विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर कृषि महाविद्यालय जगदलपुर में गूंजी ‘सच्ची आवाजें’

जुम्बा, योग और कला के जरिए विद्यार्थियों ने सीखा तनाव प्रबंधन

जगदलपुर, 10 अक्टूबर  वर्तमान डिजिटल युग में पढ़ाई के निरंतर दबाव, सोशल मीडिया के प्रभाव, घटते धैर्य और आक्रामक प्रवृत्ति के कारण युवाओं में बढ़ते मानसिक तनाव और असंतुलन को देखते हुए कृषि महाविद्यालय जगदलपुर में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम एवं ड्राइंग प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के अधीन संचालित इस महाविद्यालय में यह पहल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बस्तर के निर्देशानुसार तथा महाविद्यालय के प्रभारी अधिष्ठाता एवं परिक्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र के सह-संचालक डॉ. ए. के. ठाकुर के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुई।
कार्यक्रम की शुरुआत विद्यार्थियों के शारीरिक स्वास्थ्य को समर्पित एक ऊर्जावान जुम्बा सत्र के साथ हुई, जिसमें खेलकूद और नियमित व्यायाम की महत्ता पर प्रकाश डाला गया। इसके बाद मानसिक शांति और आंतरिक संतुलन स्थापित करने के लिए योगाभ्यास व ध्यान सत्र आयोजित किया गया, जहाँ विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर ‘पतंजलि योग एवं प्राणायाम’ के महत्व से अवगत कराया गया। इस अवसर पर डॉ. ठाकुर ने राष्ट्रीय सेवा योजना और राष्ट्रीय कैडेट कोर के संयुक्त प्रयासों की सराहना करते हुए विद्यार्थियों के जीवन में मानसिक स्वास्थ्य की महत्ता को रेखांकित किया।
शारीरिक व मानसिक अभ्यासों के पश्चात विद्यार्थियों की रचनात्मक अभिव्यक्ति को मंच देने के लिए ड्राइंग प्रतियोगिता आयोजित की गई। यह प्रतियोगिता विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वर्ष 2026 के लिए निर्धारित थीम जिए हुए अनुभवों को सुना जाए: सच्ची आवाजें, सच्चा बदलाव पर आधारित थी। प्रतियोगिता के अंतर्गत छात्र-छात्राओं ने ‘मानसिक स्वास्थ्य महत्वपूर्ण है’, ‘इट्स ओके टू बी नॉट ओके’, ‘स्वीकार्यता, सहानुभूति और मानसिक स्वास्थ्य’ तथा ‘डिजिटल लाइफ बनाम मेंटल लाइफ’ जैसे विषयों पर तूलिका के माध्यम से अपने गहरे विचार कैनवास पर उकेरे।
आयोजन को सुव्यवस्थित रूप से संपन्न कराने के लिए गठित आयोजन समिति में समन्वयक डॉ आरआर कंवर, सह-समन्वयक डॉ नीता मिश्रा, डॉ खुशबू टण्डन, डॉ महेश एस शिरसात तथा सदस्य सचिव श्री एमबी तिवारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं, उत्कृष्ट कृतियों के निष्पक्ष चयन हेतु डॉ तेजपाल चन्द्राकर के संयोजन एवं डॉ सोनाली के सह-संयोजन में निर्णायक मंडल बनाया गया, जिसमें डॉ पद्मक्षी ठाकुर, डॉ गुन्जा ठाकुर और श्री संदीप जोशी शामिल रहे। चयनित शीर्ष तीन प्रतिभागियों की सूची आगामी प्रक्रिया हेतु विधिक कार्यालय को प्रेषित की जाएगी।
सत्र के दौरान विद्यार्थियों और प्राध्यापकों के बीच खुलकर संवाद हुआ। छात्र रघुवीर ने बदलते परिवेश पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज यह समझने की जरूरत है कि हम मोबाइल चला रहे हैं या मोबाइल हमें चला रहा है। छात्रा सारिका नेताम ने संतुलित आहार, हॉबी और सच्चे दोस्तों को मानसिक संबल का आधार बताया, जबकि एनएसएस के जयंत मंडावी ने अपनी कला के जरिए विपरीत परिस्थितियों में महिलाओं के मजबूत मानसिक संतुलन को दर्शाया। छात्रा पायल ने मानसिक समस्याओं की पहचान और स्वीकार्यता पर बल दिया, वहीं छात्रा इकाई की प्रमुख हेमलता टंडन ने बताया कि ऐसे आयोजनों से मिलने वाली सकारात्मक ऊर्जा से अध्ययन की गुणवत्ता सुधरती है।
शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों को व्यावहारिक जीवन के अनमोल सूत्र दिए। डॉ नीता मिश्रा ने समाज में बढ़ते अपराधों की रोकथाम में मानसिक संतुलन को जरूरी बताया, तो डॉ खुशबू ने बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए तनावमुक्ति को आवश्यक माना। श्री तिवारी ने निस्वार्थ भाव से सेवा, डॉ चेतना ने जीवन में सच्चे मित्रों की अहमियत और डॉ महेश ने भावनाओं को दबाने के बजाय साझा करने की सीख दी। अंत में श्री संदीप जोशी ने छात्रों को भविष्य की अनावश्यक चिंता छोड़कर वर्तमान क्षण में पूरी ईमानदारी से कर्म करने हेतु प्रेरित किया। छात्र जयंत, दीप साहा, गुन्जा, भूमिका, कुणाल और हिमांशु के सक्रिय सहयोग तथा सभी विद्यार्थियों व प्राध्यापकों की गरिमामयी उपस्थिति के साथ यह जागरूकता कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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