महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश से लगे सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ाने की तैयारी
बीजापुर। इंद्रावती टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों और जंगल की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए अब नदी मार्ग से पेट्रोलिंग की तैयारी की जा रही है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध बांस से तैयार नावों का उपयोग किया जाएगा। टाइगर रिजर्व के क्षेत्रीय निदेशक उत्तम कुमार गुप्ता ने बताया कि महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में नदी मार्ग से वन सुरक्षा के लिए की जाने वाली पेट्रोलिंग की तर्ज पर इंद्रावती टाइगर रिजर्व में भी बांस की नावों से निगरानी शुरू करने की योजना है।उन्होंने बताया कि बांस की नावों के उपयोग से नदी क्षेत्र में वन अमले की पहुंच बढ़ेगी और सीमावर्ती इलाकों की निगरानी अधिक प्रभावी तरीके से की जा सकेगी। इस संबंध में आईटीआर के डीएफओ, एसडीओ, रेंजर सहित मैदानी अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं।तीन राज्यों की सीमा से जुड़ा है रिजर्वइंद्रावती टाइगर रिजर्व का विशाल वन क्षेत्र महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश की सीमाओं से जुड़ा हुआ है। ऐसे में वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों पर नजर रखना वन विभाग के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है। नदी पेट्रोलिंग शुरू होने से जंगल के साथ नदी क्षेत्र में भी वन अमले की निगरानी मजबूत होने की उम्मीद है।
शिकार से लेकर अवैध मछली पकड़ने तक पर नजर
नदी मार्ग से पेट्रोलिंग के दौरान वन्यजीवों के शिकार की गतिविधियों को रोकने, अवैध काष्ठ परिवहन पर निगरानी रखने और नदी के रास्ते होने वाली संदिग्ध आवाजाही की जांच की जाएगी। इसके अलावा नदी में अवैध मछली पकड़ने वालों पर कार्रवाई तथा संवेदनशील वन क्षेत्रों में नियमित गश्त भी की जाएगी। स्थानीय संसाधनों से तैयार बांस की नावों के इस्तेमाल से वन विभाग को नदी के उन हिस्सों तक भी पहुंच बनाने में मदद मिलेगी, जहां सामान्य वाहनों या पैदल गश्त के जरिए पहुंचना मुश्किल होता है। इससे इंद्रावती टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण और सुरक्षा तंत्र को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।