स्पान संवर्धन योजना बनी महिला किसान की आय का नया जरिया

जगदलपुर 28 जुलाई . मछली पालन विभाग की स्पान संवर्धन योजना बस्तर जिले के ग्रामीण किसानों के लिए आय का नया माध्यम बन रही है। बस्तर विकासखंड के ग्राम सिवनी की महिला किसान मनकी बघेल ने इस योजना का लाभ उठाकर मात्र दो माह में 15 हजार रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित कर मिसाल पेश की है।

मत्स्यपालन विभाग ने मनकी बघेल को मई माह में मिश्रित प्रजाति के लगभग 25 हजार स्पॉन उपलब्ध कराए। इसके साथ ही तालाब की उर्वरता बढ़ाने के लिए खाद तथा स्पान के आहार के रूप में खल्ली भी निःशुल्क प्रदान की गई। मनकी ने अपने परिवार के एक एकड़ क्षेत्र में स्थित दो तालाबों में स्पॉन का संवर्धन किया। नियमित रूप से भोजन देने, जाल चलाकर निगरानी करने और उचित देखभाल के कारण कम समय में ही उच्च गुणवत्ता की मत्स्य अंगुलिकाएं तैयार हो गईं।

मछलीपालन विभाग ने अंगुलिकाओं की पैकेजिंग और विपणन के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर, पॉलिथीन बैग, बोरी तथा निःशुल्क जाल भी उपलब्ध कराया, जिससे तैयार मत्स्य बीज को सुरक्षित रूप से बाजार तक पहुंचाना आसान हो गया।

मनकी बघेल के भतीजे सुखलाल बघेल बताते हैं कि अब तक करीब 30 किलोग्राम मत्स्य अंगुलिकाओं की बिक्री 500 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से की जा चुकी है, जिससे परिवार को सीधे 15 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में तालाब में लगभग 50 किलोग्राम अंगुलिकाएं और तैयार हैं, जिनकी बिक्री से अच्छी अतिरिक्त आमदनी होने की उम्मीद है।

सुखलाल का कहना है कि अंगुलिका उत्पादन का कार्य सामान्य मछलीपालन की तुलना में अधिक लाभदायक साबित हो रहा है। इसी अनुभव से उत्साहित होकर परिवार ने अगले वर्ष इस गतिविधि का विस्तार करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि परिवार सात एकड़ भूमि में खरीफ सीजन के दौरान उन्नत धान की खेती करता है, जबकि रबी सीजन में नदी किनारे दो एकड़ क्षेत्र में मक्का एवं विभिन्न साग-सब्जियों का उत्पादन करता है। अब कृषि के साथ-साथ अंगुलिका उत्पादन और मत्स्य पालन को भी आय का मजबूत स्रोत बनाकर परिवार की आर्थिक स्थिति को और सुदृढ़ करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।

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