सुकमा। प्रेम, स्नेह, विश्वास और नई उम्मीद की तस्वीरें उस समय देखने को मिलीं, जब सुकमा के नवपदस्थ पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर ने कभी नक्सलियों के सबसे प्रभाव वाले माने जाने वाले चिंतागुफा क्षेत्र का दौरा किया। ग्रामीणों और बच्चों के बीच पहुंचे एसपी ने आत्मीयता का परिचय देते हुए एक छोटे बच्चे को अपनी गोद में उठाया और ग्रामीणों से सहज भाव से बातचीत कर विश्वास का संदेश दिया। दौरे के दौरान एसपी मयंक गुर्जर ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और बच्चों से भी घुल-मिलकर बातचीत की। उनके इस व्यवहार ने क्षेत्र के लोगों में अपनत्व और सुरक्षा का भाव मजबूत किया। वर्षों तक भय और हिंसा की छाया में रहे इस क्षेत्र में पुलिस की यह पहल विश्वास बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। ग्रामीणों ने भी पुलिस अधिकारियों का आत्मीय स्वागत किया और बच्चों ने उनके साथ तस्वीरें खिंचवाकर अपनी खुशी जाहिर की। तस्वीरों में बच्चों के चेहरों पर मुस्कान और पुलिस अधिकारियों का स्नेह साफ दिखाई देता है, जो बदलते बस्तर और मजबूत होते जन-पुलिस संबंधों की कहानी बयां करता है। इस अवसर पर सीआरपीएफ सुकमा के डीआईजी आनंद सिंह राजपुरोहित एवं सीआरपीएफ कमांडेंट हिमांशु पांडेय भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से संवाद कर उन्हें शासन की योजनाओं का लाभ लेने, शिक्षा को बढ़ावा देने तथा शांति एवं विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का आह्वान किया। चिंतागुफा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में पुलिस और सुरक्षा बलों की यह आत्मीय पहल स्पष्ट संकेत देती है कि अब बस्तर में सुरक्षा के साथ-साथ विश्वास, संवाद और विकास को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है। यह दौरा केवल एक औपचारिक निरीक्षण नहीं, बल्कि जनता और पुलिस के बीच भरोसे के नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।