नारायणपुर, 11 जुलाई . जिले के विकासखण्ड नारायणपुर अंतर्गत ग्राम सहपाल की निवासी श्रीमती सुनिता नरवास का जीवन पहले आर्थिक कठिनाइयों से भरा हुआ था। परिवार की आय का मुख्य स्रोत सीमित कृषि और अनिश्चित मजदूरी थी, जिससे दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता था। स्थायी आय का कोई मजबूत साधन न होने के कारण परिवार का भविष्य असुरक्षित दिखाई देता था। इसके बावजूद सुनिता जी अपने परिवार को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का संकल्प लेकर निरंतर बेहतर आजीविका के अवसरों की तलाश करती रहीं।
स्व-सहायता समूह से जुड़ाव बना बदलाव की शुरुआत
सुनिता नरवास के जीवन में वास्तविक परिवर्तन तब आया जब उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत संचालित साई बाबा स्व-सहायता समूह की सदस्यता ग्रहण की। समूह की नियमित बैठकों, बचत एवं वित्तीय प्रबंधन संबंधी प्रशिक्षणों ने उनके आत्मविश्वास को नई दिशा दी। इसी दौरान उन्हें एकीकृत कृषि क्लस्टर परियोजना की जानकारी मिली। परियोजना के अंतर्गत प्राप्त तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और विशेषज्ञों के सहयोग से उन्होंने पारंपरिक आजीविका के स्थान पर आधुनिक एवं वैज्ञानिक पद्धति अपनाने का निर्णय लिया।
उन्नत बैकयार्ड मुर्गीपालन से बढ़ी आय
आईएफसी परियोजना के सहयोग से सुनिता जी ने वैज्ञानिक पद्धति से उन्नत बैकयार्ड मुर्गीपालन प्रारंभ किया। मुर्गियों के संतुलित आहार, नियमित टीकाकरण तथा उचित प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने के परिणामस्वरूप उन्हें शुरुआती चरण में ही 15,075 रूपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई। इस सफलता ने उनका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा दिया और उन्होंने मुर्गीपालन को अपनी आजीविका का सशक्त एवं स्थायी माध्यम बना लिया।
आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम
आज सुनिता नरवास का परिवार आर्थिक रूप से पहले की तुलना में कहीं अधिक सशक्त और आत्मनिर्भर बन चुका है। वे आईएफसी परियोजना के माध्यम से अपने मुर्गीपालन व्यवसाय का लगातार विस्तार कर रही हैं और आने वाले समय में 20,000 रूपये प्रति माह की नियमित आय अर्जित करने के लक्ष्य के साथ कार्यरत हैं। उनकी सफलता ने न केवल उनके परिवार के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार किया है, बल्कि वे अपने गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। अब कई महिलाएं उनसे प्रेरित होकर स्व-सहायता समूहों से जुड़ रही हैं और वैज्ञानिक आजीविका गतिविधियों को अपनाने के लिए आगे आ रही हैं।
श्रीमती सुनिता नरवास कहती है कि बिहान योजना और एकीकृत कृषि क्लस्टर (आईएफसी) ने मुझे केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर ही नहीं बनाया, बल्कि समाज में सम्मानपूर्वक जीने का आत्मविश्वास भी दिया है। आज मेरा परिवार सुरक्षित, आत्मनिर्भर और समृद्ध भविष्य की ओर अग्रसर है। मैं चाहती हूँ कि अधिक से अधिक महिलाएं इस योजना से जुड़कर अपने सपनों को साकार करें।