बिहान योजना से आत्मनिर्भर की कहानी, कस्टम हायरिंग सेंटर खोल रहा आधुनिक खेती की राह
सुकमा/ कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देशन एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री मुकुंद ठाकुर के मार्गदर्शन में सुकमा जिले में संचालित ‘बिहान योजना’ ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में क्रांति ला रही है। इसी कड़ी में विकासखंड कोंटा के ख़ुशी महिला संकुल संगठन (ढोढरा) की सोढ़ी तिरपो अब तुलसी महिला ग्राम संगठन के ‘कस्टम हायरिंग सेंटर’ के ‘पावर टिलर’ माध्यम से कृषि की नई ताकत बनकर उभरी हैं। पहले जहाँ महिलाएँ कृषि यंत्रों के परिचालन से दूर रहती थीं, वहीं अब तिरपो दीदी स्वयं आधुनिक पॉवर टिलर मशीनों का संचालन कर अपनी 30 डिसमिल बाड़ी में मक्का और मिर्ची का उन्नत उत्पादन कर रही हैं। प्रशासन की इस दूरदर्शी पहल और क्लस्टर पीआरपी श्रीमती पूजा कोड़ी के निरंतर मार्गदर्शन ने ग्रामीण महिलाओं में वह आत्मविश्वास जगाया है, जिससे वे आज कृषि क्षेत्र में नेतृत्वकारी भूमिका निभा रही हैं।
यह पहल न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त कर रही है, बल्कि क्षेत्र के छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी वरदान साबित हो रही है। पहले जिन किसानों को खेतों की जुताई और अन्य कार्यों के लिए महंगे कृषि यंत्रों के कारण भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, उन्हें अब इस कस्टम हायरिंग सेंटर के माध्यम से बेहद उचित किराए पर आधुनिक तकनीक सुलभ हो रही है। दीदी स्वयं इन यंत्रों के रख-रखाव, संचालन और किसानों को समय पर सेवा देने की जिम्मेदारी बखूबी संभाल रही हैं। इससे स्थानीय किसानों के समय और खेती की लागत दोनों में भारी कमी आई है, जिससे क्षेत्र में कृषि कार्य पहले से कहीं अधिक सुगम और लाभकारी बन गया है।
बिहान योजना के माध्यम से सुकमा जिले में महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और आधुनिक कृषि तकनीक का यह अनूठा संगम ग्रामीण विकास की एक बेमिसाल कहानी लिख रहा है। सोढ़ी तिरपो की यह लगन और सफलता आज पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है। जिला प्रशासन के इन प्रयासों से सुदूर वनांचल क्षेत्रों में न सिर्फ आधुनिक खेती का विस्तार हो रहा है, बल्कि रूढ़िवादी धारणाओं को तोड़कर महिला सशक्तीकरण की एक नई और मजबूत बुनियाद खड़ी हो रही है, जो भविष्य के समृद्ध सुकमा का मार्ग प्रशस्त करती है।